हर 100 में 61 बिहारी सरकारी राशन के दायरे में, जानिए यूपी से महाराष्ट्र तक राज्यों का पूरा आंकड़ा

लोकसभा में केंद्र सरकार ने PDS लाभार्थियों से जुड़ा आंकड़ा जारी किया है। बिहार में करीब 8.49 करोड़ और उत्तर प्रदेश में 14.75 करोड़ लोग सरकारी राशन व्यवस्था से जुड़े हैं। आबादी के अनुपात में किन राज्यों में सबसे ज्यादा लोग PDS का लाभ उठा रहे हैं, जानिए पूरी डिटेल।

Knews Desk- सरकारी राशन योजना देश के करोड़ों लोगों के लिए खाद्य सुरक्षा का अहम जरिया है। गेहूं और चावल जैसे खाद्यान्न कम कीमत या मुफ्त मिलने से लाखों परिवारों के घरेलू बजट को राहत मिलती है। अब सार्वजनिक वितरण प्रणाली यानी PDS को लेकर लोकसभा में पेश किए गए आंकड़ों से राज्यों की स्थिति की तस्वीर सामने आई है।

12 अगस्त 2026 को लोकसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने 2021 से 2025 तक PDS लाभार्थियों का राज्यवार आंकड़ा साझा किया। सरकार ने इस दौरान हटाए गए अपात्र राशन कार्डों की जानकारी भी दी है।

उत्तर प्रदेश में 2025 के दौरान करीब 14.75 करोड़ लोग PDS के लाभार्थी दर्ज किए गए। 2021 में यह संख्या करीब 15 करोड़ के आसपास थी। इसके बाद लाभार्थियों की संख्या में कुछ बदलाव आया और 2025 में यह आंकड़ा 14.75 करोड़ पर पहुंच गया।

इतनी बड़ी आबादी तक सरकारी अनाज पहुंचाने के लिए खरीद, भंडारण, परिवहन, राशन दुकानों तक वितरण और लाभार्थियों के रिकॉर्ड की लगातार निगरानी की जाती है।

बिहार में 8.49 करोड़ लोग राशन योजना से जुड़े

बिहार में 2025 के आंकड़ों के मुताबिक करीब 8.49 करोड़ PDS लाभार्थी हैं। राज्य की अनुमानित आबादी करीब 13.09 करोड़ है। इस हिसाब से बिहार में हर 100 लोगों में लगभग 65 लोग सरकारी राशन व्यवस्था के दायरे में आते हैं।

मध्य प्रदेश में 2025 में करीब 5.18 करोड़ PDS लाभार्थी दर्ज किए गए। राज्य की आबादी करीब 9 करोड़ मानी गई है। इस लिहाज से लगभग 60 फीसदी आबादी PDS सूची में शामिल है।

मध्य प्रदेश DCP यानी विकेंद्रीकृत खरीद व्यवस्था वाले राज्यों में शामिल है। इस व्यवस्था के तहत राज्य स्तर पर खरीदे गए खाद्यान्न और उसके वितरण से जुड़ी लागत के लिए केंद्र की ओर से सहायता दी जाती है।

महाराष्ट्र में 6.80 करोड़ लोग PDS के लाभार्थी

महाराष्ट्र में 2025 के दौरान करीब 6.80 करोड़ लोग PDS से जुड़े रहे। राज्य की आबादी करीब 12.93 करोड़ है। यानी आबादी के अनुपात में लगभग 53 फीसदी लोग सरकारी राशन व्यवस्था के दायरे में आते हैं।

वहीं राजस्थान में करीब 4.70 करोड़ और हरियाणा में लगभग 1.13 करोड़ PDS लाभार्थी दर्ज किए गए। आबादी के मुकाबले PDS लाभार्थियों की हिस्सेदारी देखें तो ओडिशा का आंकड़ा काफी ज्यादा है। राज्य की करीब 4.69 करोड़ आबादी में लगभग 3.26 करोड़ लोग PDS लाभार्थी हैं। यानी हर 100 में करीब 70 लोग सरकारी राशन का फायदा उठा रहे हैं।

असम में करीब 3.64 करोड़ की आबादी के मुकाबले 2.48 करोड़ लोग PDS से जुड़े हैं। यहां हर 100 लोगों में लगभग 68 लोग इस व्यवस्था का लाभ लेते हैं।

दूसरे राज्यों की तस्वीर

कर्नाटक में करीब 6.91 करोड़ आबादी के मुकाबले 4.02 करोड़ PDS लाभार्थी हैं। यानी हर 100 में करीब 58 लोग सरकारी राशन व्यवस्था से जुड़े हैं। झारखंड में करीब 4.05 करोड़ आबादी के मुकाबले 2.64 करोड़ लाभार्थी हैं। यहां यह अनुपात लगभग 65 फीसदी है।

राजस्थान में करीब 8.38 करोड़ की आबादी में 4.37 करोड़ लोग PDS सूची में शामिल हैं। यानी हर 100 में करीब 52 लोग सरकारी राशन व्यवस्था का लाभ लेते हैं। हरियाणा में करीब 3.14 करोड़ की आबादी के मुकाबले लगभग 1.26 करोड़ PDS लाभार्थी हैं। यहां हर 100 में करीब 40 लोग इस योजना के दायरे में हैं।

जम्मू-कश्मीर में 2025 में करीब 68.50 लाख PDS लाभार्थी दर्ज किए गए। 2021 में यह संख्या करीब 65.91 लाख थी।

अपात्र राशन कार्डों पर भी कार्रवाई

सरकार ने लाभार्थियों की संख्या के साथ अपात्र राशन कार्डों को हटाने का आंकड़ा भी साझा किया है। 2021 से 2025 के बीच अलग-अलग राज्यों में जांच के बाद ऐसे कार्डों को सूची से हटाया गया, जिनके लाभार्थी पात्र नहीं पाए गए।

जम्मू-कश्मीर में ही इस अवधि के दौरान 49,810 अपात्र राशन कार्ड हटाए गए। सरकार का कहना है कि PDS व्यवस्था में पात्र लाभार्थियों की सही पहचान जरूरी है, ताकि सरकारी खाद्यान्न का लाभ सही लोगों तक पहुंच सके।

राज्यों को किस तरह मिलता है फंड?

PDS के तहत राज्यों को खाद्यान्न की खरीद और वितरण से जुड़ी व्यवस्था के आधार पर अलग-अलग तरीके से सहायता मिलती है। DCP व्यवस्था वाले राज्यों को खाद्यान्न की लागत और केंद्र की योजनाओं के तहत वितरण से संबंधित खर्च में सहायता दी जाती है।

वहीं Non-DCP राज्यों में खाद्यान्न की खरीद और FCI को दिए गए अनाज के आधार पर भुगतान की व्यवस्था होती है। राजस्थान और हरियाणा इसी श्रेणी में आते हैं।

कुल मिलाकर सरकारी आंकड़े बताते हैं कि PDS देश की बड़ी आबादी तक पहुंचने वाली प्रमुख खाद्य सुरक्षा व्यवस्थाओं में शामिल है। राज्यों के बीच लाभार्थियों की संख्या और उनकी आबादी में हिस्सेदारी में काफी अंतर देखने को मिलता है।

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