बेंगलुरु के यशवंतपुर से गोवा के मडगांव के बीच प्रस्तावित वंदे भारत एक्सप्रेस अपनी कम औसत रफ्तार को लेकर चर्चा में है। इस ट्रेन से एक तरफ का सफर पूरा करने में 12 घंटे 20 मिनट लगने का अनुमान है, जबकि वापसी में 12 घंटे 55 मिनट लग सकते हैं।
KNEWS DESK- भारतीय रेलवे जल्द ही बेंगलुरु और गोवा के बीच नई वंदे भारत एक्सप्रेस शुरू कर सकता है। यशवंतपुर-मडगांव वंदे भारत एक्सप्रेस के नवंबर में शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। प्रस्तावित ट्रेन अपनी रफ्तार के कारण दूसरी वंदे भारत सेवाओं से अलग होगी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, यशवंतपुर से मडगांव तक पहुंचने में ट्रेन को 12 घंटे 20 मिनट लग सकते हैं। वहीं, मडगांव से यशवंतपुर लौटने में करीब 12 घंटे 55 मिनट का समय लगने का अनुमान है। इस सेवा के लिए ट्रेन नंबर 26655/26656 प्रस्तावित बताए जा रहे हैं।
इस ट्रेन की खास बात इसकी औसत रफ्तार है। बेंगलुरु से गोवा की दिशा में इसकी औसत गति लगभग 54 किलोमीटर प्रति घंटे और वापसी में 53 किलोमीटर प्रति घंटे रहने का अनुमान है। इतनी कम औसत रफ्तार के कारण इसे देश की सबसे धीमी वंदे भारत सेवाओं में शामिल किए जाने की चर्चा है। हालांकि, इसकी वास्तविक समय-सारिणी और परिचालन संबंधी जानकारी रेलवे की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी।
दूसरी वंदे भारत ट्रेनों से कितनी अलग होगी यह सेवा?
देश में चलने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों की गति और यात्रा अवधि उनके रूट, ठहराव और रेलवे ट्रैक की स्थिति पर निर्भर करती है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, पुणे-अजनी वंदे भारत एक्सप्रेस लगभग 882 किलोमीटर की दूरी तय करने में करीब 12 घंटे लेती है। इसकी औसत रफ्तार लगभग 73 किलोमीटर प्रति घंटे बताई जाती है। वहीं, वाराणसी-मेरठ वंदे भारत एक्सप्रेस को एक दिशा में 783 किलोमीटर की दूरी तय करने में लगभग 11 घंटे 55 मिनट और दूसरी दिशा में 11 घंटे 50 मिनट लगते हैं। इसके मुकाबले वाराणसी-नई दिल्ली वंदे भारत एक्सप्रेस करीब 759 किलोमीटर का सफर लगभग आठ घंटे में पूरा करती है। इन ट्रेनों के यात्रा समय में अंतर का प्रमुख कारण अलग-अलग रेल मार्गों की परिचालन परिस्थितियां हैं।
सिंगल ट्रैक और घाट सेक्शन से बढ़ सकता है यात्रा का समय
यशवंतपुर-मडगांव रूट पर ट्रेन की औसत रफ्तार कम रहने की प्रमुख वजह रेलवे ट्रैक की स्थिति बताई जा रही है। इस मार्ग का बड़ा हिस्सा सिंगल लाइन वाला है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, यशवंतपुर से चिक्काबनावारा के बीच करीब आठ किलोमीटर और मंगलुरु जंक्शन से थोकुर के बीच लगभग 16 किलोमीटर का हिस्सा डबल लाइन है। सिंगल लाइन पर दोनों दिशाओं से आने वाली ट्रेनों का संचालन करने के लिए क्रॉसिंग की व्यवस्था करनी पड़ती है। ऐसे में कई बार ट्रेनों को दूसरे स्टेशनों पर रुकना पड़ता है, जिससे यात्रा की अवधि बढ़ सकती है।
इस रूट का सकलेशपुर से सुब्रह्मण्या रोड के बीच का लगभग 50 किलोमीटर लंबा घाट सेक्शन भी एक बड़ी चुनौती है। पहाड़ी और घुमावदार रास्ते के कारण इस हिस्से में ट्रेनों की गति सीमित रखनी पड़ती है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, यहां अधिकतम गति सीमा लगभग 30 किलोमीटर प्रति घंटे है। इन परिस्थितियों के चलते आधुनिक वंदे भारत ट्रेन होने के बावजूद इस मार्ग पर तेज गति से संचालन करना आसान नहीं होगा।
संचालन के लिए दो रेक की जरूरत
यशवंतपुर-मडगांव वंदे भारत एक्सप्रेस के संचालन के लिए दो रेक की जरूरत होने की जानकारी सामने आई है। भारतीय रेलवे की कई वंदे भारत सेवाएं एक ही रेक से संचालित होती हैं, जबकि कुछ लंबे मार्गों पर चलने वाली सेवाओं में दो रेक का इस्तेमाल किया जाता है। प्रस्तावित बेंगलुरु-गोवा सेवा में भी परिचालन और समय-सारिणी की जरूरतों के अनुसार दो रेक का उपयोग किया जा सकता है।
नई ट्रेन शुरू होने से बेंगलुरु और गोवा के बीच रेल कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है। खासकर उन यात्रियों को फायदा मिल सकता है, जो दोनों शहरों के बीच आरामदायक रेल यात्रा करना चाहते हैं। हालांकि, इसकी कम औसत रफ्तार और लंबी यात्रा अवधि को देखते हुए यात्रियों की नजर रेलवे की अंतिम समय-सारिणी और आधिकारिक घोषणा पर रहेगी।