विपक्ष ने बाटी जिम्मेदारी,जन जन की सरकार भारी ! 

उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई है. सभी दलों की तैयारियां चरम पर हैं,और मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच माना जा रहा है. एक ओर भाजपा अपनी उपलब्धियों के आधार पर सत्ता में वापसी का दावा कर रही है,वहीं कांग्रेस लगातार सरकार की कमियों को जनता के बीच उठा रही है. इसी क्रम में दोनों दल प्रदेश भर में सम्मेलन और आयोजन कर रहे हैं. कांग्रेस प्रदेश के सभी पहाड़ी जिलों में परिवर्तन संकल्प सम्मेलन कर रही है,जबकि 4 जुलाई को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के पांच साल पूरे होने पर भाजपा सेवा पखवाड़ा और जन-जन की सरकार अभियान का दूसरा चरण चला रही है.इन्ही चुनावी तैयारियों के बीच कांग्रेस ने संगठन को मजबूत करने के लिए बड़ा फैसला भी लिया है. अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष की मंजूरी के बाद उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी का गठन कर दिया है और आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है. जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार समिति में कई वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं को शामिल किया गया है.इसके साथ ही कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव के. सी. वेणुगोपाल कल 9 जुलाई से दो दिवसीय दौरे पर उत्तराखंड आ रहे हैं, उनका मकसद आगामी चुनावों के लिए पार्टी को धार देना है. इससे पहले प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा कई बार प्रदेश का दौरा कर चुकी हैं. वही भाजपा कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी को लेकर तंज कसती रही है और अब राष्ट्रीय महासचिव के दौरे पर भी निशाना साध रही है, जिसके बाद दोनों दलों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है और दोनों दल अपने अपने दावे पेश करते भी नज़र आ रहे है.

उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही सियासी सरगर्मी तेज हो गई है. मैदान में सीधा मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच है. भाजपा अपनी उपलब्धियां गिना कर सत्ता में वापसी का दावा कर रही है तो वहीं कांग्रेस, सरकार की कमियों को जनता के सामने रख परिवर्तन संकल्प सम्मेलन के जरिए पहाड़ों में हमलावर है.4 जुलाई को मुख्यमंत्री धामी के 5 साल पूरे होने पर भाजपा जन-जन की सरकार अभियान का दूसरा चरण भी चला रही है. वही चुनावी रणनीति को धार देने के लिए कांग्रेस ने बड़ा कदम उठाया है. AICC ने उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस की पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी का गठन कर दिया है. इसी कड़ी में कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव के. सी. वेणुगोपाल कल से दो दिन के दौरे पर उत्तराखंड पहुंच रहे हैं, उधर भाजपा भी कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के दौरों पर तंज कसती नज़र आ रही है. भाजपा का मानना है कि कांग्रेस के भीतर आपसे गुटबाजी की आग को राष्ट्रीय महासचिव भी शांत नहीं कर सकेंगे. तो दूसरी ओर कांग्रेस भी भाजपा के सेवा पखवाड़े और जन जन की सरकार अभियान को दिखावा व टारगेट सेट करना जता रही है. जिसके चलते राजनितिक गलियारों में बयानबाज़ी के तीर भी चलते दिखाई दे रहे है.

कुल मिलाकर उत्तराखंड की सियासी जमीन पर भाजपा और कांग्रेस दोनों ही चुनावी मोड में आ चुकी हैं और एक-दूसरे पर सीधा हमला कर रही हैं. भाजपा जहां केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाकर विश्वास जीतने की कोशिश में है,वहीं कांग्रेस संगठनात्मक बदलाव और जमीनी आंदोलन के जरिए सत्ता विरोधी लहर बनाने में जुटी है. पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी के गठन और के. सी. वेणुगोपाल के दौरे से साफ है कि कांग्रेस इस बार हर सीट पर पहले से ज्यादा आक्रामक रणनीति के साथ मैदान में उतरना चाहती है. वहीं भाजपा भी सेवा पखवाड़े और उपलब्धियों के प्रचार से अपनी पकड़ मजबूत रखने में लगी है. ऐसे में आने वाले महीनों में दोनों दलों की बयानबाजी, सम्मेलन और दौरों से राज्य का राजनीतिक तापमान और बढ़ने के आसार हैं. अंतिम फैसला जनता के हाथ में होगा, लेकिन फिलहाल दोनों ही दल कोई कोर-कसर छोड़ने के मूड में नहीं दिख रहे.

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