उत्तराखंड डेस्क रेपोर्ट, उत्तराखंड में चुनाव आने से पहले एक और नया मुद्दा गरमा गया है. सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के बाद दून पुलिस ने अभियान चलाते हुए बिना अनुमति और निर्धारित मानकों के विपरीत संचालित मस्जिदों में लाउडस्पीकरों पर कार्रवाई की है जिसके चलते निर्धारित मानकों से अधिक ध्वनि में बजने वाले लाउडस्पीकर हटाए गए. इसके साथ ही पुलिस ने भविष्य में नियमों के उल्लंघन पर संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी है. हालांकि सरकार इसे पर्यावरण से जुड़ा मुद्दा बता रहो है लेकिन वहीं समुदाय विशेष इससे नाराज़ नज़र आ रहे है. बीते दिनों इस विषय के चलते कई समुदाय विशेष के लोगों ने जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन भी किया. और आरोप लगाया कि सरकार एक ही धर्म पर कार्रवाई कर रही है, इसके साथ ही पुलिस को पहले अपनी गाड़ियों से हूटर हटाने का काम करें.क्योंकि गाड़ियों के बजने वाला हूटर भी मानकों के विपरीत चल रहें है.अभियान के दौरान अलग-अलग क्षेत्र में पुलिस टीमों ने उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के साथ संयुक्त निरीक्षण किया. इस दौरान धार्मिक स्थलों पर लगाए गए ध्वनि विस्तारक यंत्रों की जांच की गई. जिन स्थानों पर लाउडस्पीकर निर्धारित ध्वनि सीमा से अधिक आवाज में संचालित पाए गए या आवश्यक अनुमति नहीं मिली,वहां उन्हें तत्काल हटाया गया.अभियान के दौरान बिना अनुमति और निर्धारित मांगों के विपरीत संचालित 43 धार्मिक स्थलों से निर्धारित ध्वनि सीमा से अधिक आवाज में बज रहे लाउडस्पीकर हटाए और भविष्य में नियमों का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं.वही मुस्लिम संगठनों ने सरकार के इस फैसले का विरोध करते हुए जिलाधिकारी दफ्तर का घेराव किया साथ ही कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों ने धामी सरकार पर कई आरोप लगाए ऐसे में एक ही समुदाय विशेष को टारगेट करना भाईचारे को खत्म करने की बात तक की गई.जिस पर आज भी विरोध और अभियान जारी है.
देहरादून में अलग-अलग जगह धार्मिक से लाउडस्पीकर हटाने पर कुछ लोगों ने जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की. मुस्लिम सेवा संगठन के अध्यक्ष नईम कुरैशी ने कहा कि नोटिस के न्यायालय के आदेशों का हवाला देते हुए मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाए जा रहे हैं.वही उत्तराखंड में धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर हटाने की कार्रवाई को लेकर सियासत गरमा गई है। विपक्ष ने सरकार पर धर्म विशेष को निशाना बनाने का आरोप लगाया है। वहीं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सरकार कानून और व्यवस्था के तहत काम कर रही है, लेकिन कांग्रेस हर मुद्दे पर विरोध करने की राजनीति करती है। सीएम धामी ने कहा कि लाउडस्पीकर का उपयोग दूसरों को परेशान करने के लिए नहीं होना चाहिए, बल्कि यह व्यक्तिगत आस्था का विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने हमेशा तुष्टिकरण की राजनीति की है और विकास के कार्यों का हमेशा से विरोध ही किया है।
आपको बता दे,देहरादून की मस्जिदों में आजान के लिए लाउडस्पीकर का प्रयोग दिन में 10 से 15 मिनट के लिए किया जाता है और ध्वनि स्तर उत्तराखंड शासन के पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन विभाग की ओर से निर्धारित मांगों के अनुरूप रखा जाता है. ध्वनि प्रदूषण संबंधी किसी शिकायत पर मस्जिद की प्रबंध समिति या शहर काजी करने को सूचना देनी चाहिए, जिससे निश्चित मांगों के अनुरूप आवश्यक पालन तत्काल किया जा सके.साथ ही मुस्लिम वर्ग का ये भी मानना है की सरकार एक ही समुदाय के खिलाफ कार्रवाई कर रही है और नगर निगम की कूड़ा उठाने की गाड़ियां या फिर पुलिस की गाड़ियों में बजने वाले हूटर भी ध्वनि मानकों के विपरीत है.सरकार ने हमारी मांग नहीं मानी तो वो सड़क पर उतरने के लिए मजबूर होंगे.अब ऐसे में देखना होगा शुरू हुआ ये नया विवाद आखिरकार कब तक थम पायेगा।