सरकार बताये कमाल, विपक्ष उठाये सवाल !

उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, उत्तराखंड में वर्ष 2023 दिसंबर में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट एक बार फिर सियासी सुर्खियों में है। प्रदेश में निवेश लाने और अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए आयोजित इस समिट को लेकर एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी के ट्वीट के बाद निवेश और विकास का मुद्दा देहरादून से लेकर दिल्ली तक चर्चा में है। दरअसल, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में आयोजित इस समिट के दौरान सरकार ने 1779 MOU पर हस्ताक्षर किए थे, जिनके जरिए करीब 3 लाख 56 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले थे। लगातार भाजपा सरकार ने समय समय पर समिट को काफी महत्व दिया और धामी सरकार इसे अधिक बढ़ावा देती दिख रही है। इसके ज़रिये राज्य सरकार का मुख्य उद्देश्य उत्तराखंड को निवेश के नए केंद्र के रूप में स्थापित करना, उद्योगों को बढ़ावा देना, युवाओं के लिए रोजगार पैदा करना और प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों को गति देना रहा है। पहाड़ी राज्य उत्तराखंड के लिए निवेश को बढ़ावा देना इसलिए भी अहम है, क्योंकि इससे रोजगार, पर्यटन, उद्योग और बुनियादी सुविधाओं के विकास को नई दिशा मिल सकती है। सरकार की ओर से निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारने के लिए लगातार प्रयास किए जाने की बात कही जाती रही है। वहीं हालही में लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस समिट को केवल बड़ा प्रचार बताते हुए कई सवाल खड़े किए हैं। इसके बाद प्रदेश कांग्रेस ने भी अपने नेता का समर्थन किया है। उधर, राज्य सरकार ने समिट के संदर्भ में कथित तौर पर भ्रम और अनधिकृत सामग्री का दुष्प्रचार करने वालों पर एफआईआर शुरू कर दी है। जिसके बाद इन सबके बीच आपसी बयानबाजी चरम पर देखी जा रही है।

उत्तराखंड में 2023 की ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट एक बार फिर सियासत के केंद्र में है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के ट्वीट के बाद निवेश के आंकड़ों पर सवाल उठने लगे हैं। राज्य सरकार शुरू से ही मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में दिसंबर 2023 में आयोजित समिट के दौरान 1779 MOU साइन करने और 3.56 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिलने का दावा कर रही हैं। सरकार का कहना है कि एक लाख करोड़ का निवेश धरातल पर उतर चुका है। वहीं राहुल गांधी ने ट्वीट कर समिट को सिर्फ प्रचार बताया है, उनके मुताबिक आटा चक्की, खाद-बीज की दुकान और छोटे क्लीनिक तक को निवेश के रूप में गिना गया है। उन्होंने अपने ट्वीट में जिक्र किया कि 35 हजार 279 करोड़ यानी 35 प्रतिशत निवेश तो सरकारी बिजली कंपनियों का ही है। सीएसआर से चलने वाले एक स्कूल को 24 करोड़ का निवेश बता दिया गया, जबकि 1200 करोड़ के एक निवेश की चार साल से कमाई शून्य है और रिकॉर्ड में उसका एक भी कर्मचारी नहीं है। राहुल के बयान के बाद प्रदेश कांग्रेस ने भी समर्थन किया है। उधर, राज्य सरकार ने भ्रम फैलाने वालों पर एफआईआर की कार्रवाई शुरू कर दी है जिसके चलते अनधिकृत सामग्री प्रसारित करने पर राजधानी देहरादून में अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। सरकार का लगातार कहना है कि निवेश से सम्बन्धित सभी आंकड़े सार्वजनिक है। इन सबके के बीच राजनीति भी तेज़ है।

कुल मिलाकर, उत्तराखंड ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट अब सिर्फ निवेश का मुद्दा नहीं, बल्कि सियासी जंग बन चुका है। एक तरफ राज्य सरकार इसे प्रदेश के विकास, उद्योग और रोजगार के लिए मील का पत्थर बता रही है, तो दूसरी ओर कांग्रेस नेता राहुल गांधी और कांग्रेस इसे आंकड़ों की बाजीगरी और प्रचार का हथकंडा करार दे रहे हैं। आटा चक्की से लेकर स्कूल तक को निवेश बताने के आरोपों ने सरकार की साख पर सवाल खड़े किए हैं। उधर, सरकार द्वारा भ्रम फैलाने वालों पर एफआईआर की कार्रवाई शुरू हो चुकी है। अब देखना होगा कि ये विवाद जांच और तथ्यों की कसौटी पर कितना टिकता है, या फिर ये सियासी बयानबाजी में ही उलझ कर रह जाते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *