मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने प्रस्ताव से जुड़ी प्रक्रिया पर अपनी बात रखी है। नियमों के मुताबिक, यदि जांच समिति आरोपों को सही पाती है, तो मामला संसद में आगे बढ़ सकता है। हालांकि, मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की प्रक्रिया संवैधानिक प्रावधानों के तहत पूरी की जाती है।
Knews Desk – मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया के समान है। इसके तहत प्रस्ताव स्वीकार किए जाने पर आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की जाती है। समिति में सुप्रीम कोर्ट का एक न्यायाधीश, किसी हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश और एक प्रतिष्ठित विधिवेत्ता शामिल होते हैं।
यदि जांच समिति अपनी रिपोर्ट में आरोपों को सिद्ध दुराचार या अक्षमता के रूप में सही पाती है, तो प्रस्ताव संसद में विचार और मतदान के लिए आगे बढ़ सकता है।
मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने का प्रस्ताव लाने के लिए लोकसभा में कम से कम 100 सांसदों या राज्यसभा में कम से कम 50 सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी होते हैं। प्रस्ताव को स्वीकार करना है या नहीं, इसका फैसला संबंधित सदन के पीठासीन अधिकारी यानी लोकसभा अध्यक्ष या राज्यसभा के सभापति करते हैं।
यदि प्रस्ताव स्वीकार किया जाता है, तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत जांच समिति गठित की जाती है। समिति की रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की संसदीय कार्रवाई तय होती है।
संसद में पारित करने के लिए चाहिए विशेष बहुमत
जांच समिति आरोपों को सही पाती है, तो प्रस्ताव को संसद के दोनों सदनों में आवश्यक विशेष बहुमत से पारित करना होगा। इसके लिए सदन की कुल सदस्य संख्या का बहुमत और उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई मतों का समर्थन जरूरी है।
दोनों सदनों से प्रस्ताव पारित होने के बाद इसे राष्ट्रपति के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है। इसके बाद राष्ट्रपति के आदेश से पद से हटाने की प्रक्रिया पूरी होती है।
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ पहले भी आए थे प्रस्ताव
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 2026 में पहले भी हटाने के प्रस्ताव से जुड़े नोटिस दिए जा चुके हैं। लोकसभा में 12 मार्च को 130 सांसदों के हस्ताक्षर वाला नोटिस दिया गया था, जिसे लोकसभा अध्यक्ष ने स्वीकार नहीं किया। वहीं, राज्यसभा में अप्रैल में भी विपक्षी सांसदों ने नोटिस दिया था। इस मुद्दे पर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच राजनीतिक विवाद जारी है।
मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की प्रक्रिया को कठिन रखने का उद्देश्य चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता की रक्षा करना है। इसलिए किसी प्रस्ताव के आने मात्र से पद से हटाने की प्रक्रिया पूरी नहीं होती। निर्धारित जांच, संसदीय बहुमत और संवैधानिक प्रक्रिया के सभी चरणों का पूरा होना जरूरी है।