उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, उत्तराखंड की सियासत में इन दिनों समाज कल्याण मंत्री खजान दास के खिलाफ उन्हीं की पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा SCSP और TSP योजनाओं में कमीशनखोरी के आरोपों को लेकर किया गया प्रदर्शन अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि इसी मामले से जुड़े एक और घटनाक्रम ने भाजपा मुख्यालय से लेकर सियासी गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।दरअसल, बीते रोज भाजपा मुख्यालय में पार्टी को शक्ति व समर्थन मिलने पर जश्न की पूरी तैयारी थी, टेबल पर भगवा पटके सजे थे, मिठाई के डिब्बे रखे थे और जौनसार बावर से 26 परिवारों के 60 लोग कांग्रेस छोड़कर कमल का दामन थामने पहुंचे थे, जिसे जौनसार की सियासत में भाजपा का मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा था।लेकिन तभी सीन में एंट्री हुई कैबिनेट मंत्री खजान दास की,और मंत्री के दफ्तर में आते ही माहौल में सन्नाटा छा गया और पूरी ज्वाइनिंग पर ब्रेक लग गई। जिसके चलते 60 लोग बिना पटका पहने ही भाजपा दफ्तर से बैरंग लौट गए और दफ्तर के अंदर ही हाईवोल्टेज ड्रामा शुरू हो गया। बताया जा रहा है, कि रविवार को मंत्री के सरकारी आवास के बाहर प्रदर्शन करने वाले यही कार्यकर्ता थे, जिनका नारा था,सरकारी योजनाओं में कमीशनखोरी बंद करो। वही अब ज्वाइनिंग रोकने को उसी बगावत का बदला बताया जा रहा है। जिससे सवाल खड़े हो रहे हैं, कि क्या भाजपा में ज्वाइनिंग अब पार्टी तय करेगी या मंत्री की मर्जी से होगी। जब मीडिया ने मंत्री से इस पर सवाल किया तो उन्होंने खुद को बहुत छोटा और सस्ता आदमी बताकर पल्ला झाड़ लिया, हालांकि संगठन की मजबूती की बात जरूर कही। लेकिन इस पूरे मामले ने आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला जरूर तेज़ कर दिया है। एक ओर सत्ता पक्ष सफाई देता नज़र आ रहा है.वही विपक्ष सत्ता पक्ष पर कई सवाल खड़े कर रहा है।
उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश भाजपा में अंतरकलह सामने आती नज़र आ रही गई है। मामला ये है कि जौनसार बावर के 26 परिवारों के 60 कार्यकर्ता कांग्रेस का हाथ छोड़ भाजपा का दामन थामने देहरादून मुख्यालय पहुंचे थे। दफ्तर में ज्वाइनिंग के लिए भगवा पटके और मिठाई तैयार थी, लेकिन ऐन मौके पर समाज कल्याण मंत्री खजान दास पहुंच गए और पूरी ज्वाइनिंग रुकवा दी गई। बताया जा रहा है.कि रविवार को इन्हीं लोगों ने मंत्री के सरकारी आवास के बाहर SCSP और TSP योजनाओं में 20 फीसदी कमीशनखोरी व सत्ता पक्ष के लोगों को छोड़ विपक्ष के लोगों को योजना का लाभ देने का आरोप लगाकर हंगामा किया था. हालांकि प्रदर्शनकारियों ने अपने कृत्य की माफ़ी मांगने के लिए पार्टी मुख्यलय का बड़ी संख्या में रुख किया साथ ही पार्टी में शामिल होने का दावा भी करते नजर आए लेकिन नाराजगी के चलते मंत्री ने ज्वाइनिंग पर ब्रेक लगवा दिया। इससे भाजपा मुख्यालय में अफरा तफरी मच गई और 60 लोग बिना भाजपा में शामिल हुए ही लौटने को मजबूर हो गए। जिसके चलते इस घटनाक्रम से दो बड़े सवाल खड़े हो गए हैं, पहला यह कि क्या भाजपा में जॉइनिंग मंत्री की मर्जी से तय होगी। और दूसरा,क्या ये कमीशनखोरी के आरोपों का बदला है। उधर मंत्री ने मीडिया के सवाल पर खुद को सस्ता और छोटा आदमी बताकर किनारा कर लिया, तो संगठन का कहना है कि प्रदेश अध्यक्ष की गैर मौजूदगी में ज्वाइनिंग नहीं हो सकी। बाते कुछ भी हो लेकिन इस सबके बीच राजनीति भी जमकर होती नज़र आ रही है।
फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम ने उत्तराखंड भाजपा की अंदरूनी कलह को एक बार फिर सतह पर ला दिया है। जौनसार बावर से आए 26 परिवारों के 60 लोगों की ज्वाइनिंग को रोकना सिर्फ एक कार्यक्रम का टलना नहीं है, बल्कि यह मंत्री बनाम कार्यकर्ता की सीधी टकराव की तस्वीर भी बया कर रहा है। एक तरफ SCSP और TSP जैसी महत्वपूर्ण सरकारी योजनाओं में 20 फीसदी कमीशनखोरी के गंभीर आरोप लग रहे हैं, जिसको लेकर पार्टी के ही कार्यकर्ता मंत्री खजान दास के आवास के बाहर प्रदर्शन कर चुके हैं, तो दूसरी तरफ उन्हीं कार्यकर्ताओं को भाजपा में शामिल होने से रोकना, इसे बगावत का बदला बताया जा रहा है। वही मंत्री का कैमरे के सामने खुद को बहुत छोटा और सस्ता आदमी कहकर सवाल टाल देना और संगठन द्वारा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट की अनुपस्थिति का तर्क देना, इस मामले को और पेचीदा बना रहा है। अब बड़ा सवाल यही है कि क्या भाजपा में कार्यकर्ताओं की जॉइनिंग पार्टी संगठन तय करेगा या मंत्री की मर्जी से। आने वाले दिनों में देखना होगा कि क्या ये 60 लोग फिर से भाजपा का दामन थामते हैं या सियासत कोई नया मोड़ लेती है।