Knews Desk- दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ से जुड़े विवाद के बाद मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। खालड़ा ने 1990 के दशक में पंजाब पुलिस पर गंभीर आरोपों का खुलासा किया था, जिसके बाद उनकी गुमशुदगी आज भी रहस्य बनी हुई है। उनकी पत्नी परमजीत कौर खालड़ा पिछले कई दशकों से न्याय की लड़ाई लड़ रही हैं।
6 सितंबर 1995: दिनदहाड़े अपहरण का आरोप
6 सितंबर 1995 की सुबह अमृतसर के कबीर पार्क में खालड़ा अपने घर के बाहर कार धो रहे थे। आरोप है कि इसी दौरान पुलिस की एक वैन वहां पहुंची और उन्हें जबरन उठा लिया गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, वर्दीधारी पुलिसकर्मी हथियारों से लैस थे और उन्हें वैन में डालकर मौके से ले गए। इसके बाद खालड़ा कभी वापस नहीं लौटे।
पंजाब पुलिस पर गंभीर खुलासों का आरोप
खालड़ा ने पंजाब में आतंकवाद के दौर में कथित तौर पर पुलिस द्वारा किए गए गैरकानूनी दाह संस्कार और जबरन गुमशुदगियों को उजागर किया था। उन्होंने दावा किया था कि कई शवों को बिना पहचान के जला दिया गया। उनके इन खुलासों के बाद ही उनका नाम लगातार विवादों और जांच के दायरे में आता रहा।
सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा मामला

11 सितंबर 1995 को यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जब एक टेलीग्राम को ही बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका मान लिया गया। कोर्ट ने पंजाब के गृह सचिव, डीजीपी और एसएसपी अमृतसर को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। इसके साथ ही खालड़ा की पत्नी परमजीत कौर ने भी अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दायर कर न्याय की मांग की।
CBI जांच और चौंकाने वाले खुलासे
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर CBI ने जांच की और 3 महीने में रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट में कई पुलिस अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए गए। जांच में यह भी सामने आया कि बड़ी संख्या में शवों की पहचान नहीं हो पाई थी। कोर्ट ने इसे गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन माना और आगे जांच के आदेश दिए।
सालों बाद सजा और कानूनी कार्रवाई
2011 में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दोषी पाए गए पांच पुलिस अधिकारियों की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा। इससे पहले निचली अदालत और हाईकोर्ट ने भी सजा सुनाई थी। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामले कानून व्यवस्था पर जनता का भरोसा कमजोर करते हैं।
आज भी जारी है न्याय की लड़ाई
परमजीत कौर खालड़ा आज भी अपने पति के लिए न्याय की मांग कर रही हैं। उनका कहना है कि खालड़ा ने जो सच उजागर किया था, उसे इतिहास से मिटने नहीं दिया जाना चाहिए। फिल्म ‘सतलुज’ से जुड़े विवाद के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है और पुराने सवाल फिर से उठने लगे हैं।