Knews Desk- राज्यसभा में एंटी पेपर लीक विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष और विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे की ‘मनुस्मृति’ संबंधी टिप्पणी को लेकर सदन में तीखी नोकझोंक देखने को मिली। विवाद बढ़ने के बाद सभापति ने उनकी टिप्पणी को कार्यवाही के रिकॉर्ड से हटाने का निर्देश दिया।
बहस के दौरान खरगे ने आरोप लगाया कि नए पाठ्यक्रम में मनुस्मृति से जुड़ी बातें शामिल की जा रही हैं। इस पर सभापति ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए सवाल किया कि मनुस्मृति का पेपर लीक विधेयक से क्या संबंध है। इसके बाद सत्ता पक्ष के सदस्यों ने भी इस बयान पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई।
सदन के नेता और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि खरगे का बयान तथ्यों पर आधारित नहीं है और ऐसे आरोप समाज में अनावश्यक भ्रम और अशांति पैदा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा कोई दावा किया जा रहा है तो मनुस्मृति का प्रमाणिक मूल पाठ प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने भी इस मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए विभिन्न ऐतिहासिक और संवैधानिक संदर्भों का उल्लेख किया। उन्होंने पूर्व न्यायाधीश सर विलियम जोन्स और डॉ. भीमराव आंबेडकर की पुस्तकों का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी दावे से पहले प्रमाणिक स्रोतों का उल्लेख आवश्यक है।
इस पर कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने जवाब देते हुए कहा कि जिस पुस्तक का हवाला दिया जा रहा है, वह बीजेपी शासनकाल में प्रकाशित हुई है और उस पर कोई प्रतिबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि उसमें कोई आपत्तिजनक सामग्री है तो इसकी जिम्मेदारी सरकार की भी बनती है। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई।
हंगामे के बीच सभापति ने घोषणा की कि मल्लिकार्जुन खरगे की मनुस्मृति संबंधी टिप्पणी को सदन की कार्यवाही से हटा दिया जाएगा।
इसी चर्चा में केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने भर्ती परीक्षाओं की व्यवस्था पर सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि देश की प्रमुख भर्ती एजेंसियों में UPSC, कर्मचारी चयन आयोग (SSC), रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB), इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सोनल और उच्च शिक्षा में प्रवेश के लिए राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा एजेंसी बनाने का विचार पहली बार 1992 में सामने आया था और बाद में यूपीए सरकार के दौरान गठित समितियों ने भी इसकी सिफारिश की थी। जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए सरकार ने उस लंबे समय से लंबित प्रस्ताव को लागू कर देश को एक राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी उपलब्ध कराई।