अजित पवार के निधन के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में नेतृत्व, संगठनात्मक नियुक्तियों और शरद पवार गुट के साथ संभावित विलय को लेकर मंथन तेज हो गया है। अमित शाह से मुलाकात और कोर कमेटी की बैठक के बाद पार्टी के भीतर मतभेद सामने आने की खबरें हैं। वित्त मंत्रालय और दोनों गुटों के भविष्य को लेकर भी चर्चाएं जारी हैं।
Knews Desk – अजित पवार के निधन के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के सामने संगठन को संभालने और भविष्य की राजनीतिक रणनीति तय करने की चुनौती है। पार्टी में बड़े फैसले लेने की प्रक्रिया, वरिष्ठ नेताओं की भूमिका और शरद पवार के नेतृत्व वाले गुट के साथ संभावित विलय जैसे मुद्दों पर चर्चा चल रही है। इसी बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ NCP नेताओं की मुलाकात और मुंबई में हुई कोर कमेटी की बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, कोर कमेटी की बैठक में कुछ वरिष्ठ नेताओं ने पार्थ पवार के काम करने के तरीके पर नाराजगी जताई। नेताओं की आपत्ति मुंबई अध्यक्ष पद पर जीशान सिद्दीकी और राष्ट्रीय प्रवक्ता पद पर उमेश पाटील की नियुक्तियों को लेकर थी। उनका कहना था कि इन नियुक्तियों से पहले कोर कमेटी के सदस्यों से सलाह-मशविरा किया जाना चाहिए था। बैठक में पार्थ पवार और जय पवार ने भरोसा दिलाया कि आगे से बड़े फैसले वरिष्ठ नेताओं से चर्चा के बाद लिए जाएंगे।
अमित शाह से मुलाकात में वित्त मंत्रालय का मुद्दा
सूत्रों के मुताबिक, अमित शाह के साथ हुई मुलाकात में NCP नेताओं ने जल्द से जल्द वित्त मंत्रालय दिए जाने की मांग रखी। पार्टी ने दोनों राष्ट्रवादी कांग्रेस गुटों के विलय को लेकर भी अपना रुख सामने रखा। रिपोर्ट के अनुसार, NCP अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाए रखने के साथ सरकार में अपनी हिस्सेदारी मजबूत करना चाहती है।
NCP के भीतर चर्चा का एक बड़ा मुद्दा शरद पवार के नेतृत्व वाले गुट के साथ संभावित विलय है। सूत्रों के मुताबिक, प्रफुल्ल पटेल दोनों गुटों के एक होने के पक्ष में हैं, जबकि सुनेत्रा पवार इसके पक्ष में नहीं हैं। वह पार्टी को अलग पहचान के साथ अपने नेतृत्व में आगे बढ़ाना चाहती हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, अजित पवार के निधन से पहले दोनों गुटों के वरिष्ठ नेताओं के बीच विलय को लेकर चार बार बैठक हुई थी। अब इस बात पर नजर है कि उन चर्चाओं को आगे बढ़ाया जाएगा या दोनों गुट अलग-अलग राजनीतिक राह पर चलते रहेंगे।
संभावित विलय की स्थिति में पार्टी की कमान किसके हाथ में होगी और सुप्रिया सुले को क्या जिम्मेदारी मिलेगी, जैसे सवाल भी चर्चा में हैं। हालांकि, इन मुद्दों पर किसी अंतिम फैसले की जानकारी सामने नहीं आई है।
विलय को लेकर बीजेपी की भूमिका भी अहम
दोनों गुटों के विलय को लेकर बीजेपी का रुख भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस संभावित राजनीतिक बदलाव के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या शरद पवार NDA में शामिल होंगे और क्या बीजेपी इस तरह के गठबंधन के लिए तैयार होगी। फिलहाल इस संबंध में किसी अंतिम निर्णय की पुष्टि नहीं हुई है।
कोर कमेटी की बैठक में पार्टी के सभी विधायकों की संयुक्त बैठक बुलाने का फैसला भी लिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, नेताओं और विधायकों के बीच बातचीत का सिलसिला फिर से शुरू करने पर सहमति बनी। इसके अलावा सूखा प्रभावित इलाकों में मंत्रियों और विधायकों को दौरे पर भेजने का निर्णय लिया गया।
संजय राउत ने NCP पर साधा निशाना
इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर NCP को लेकर टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र के स्वाभिमान और एक मराठी नेता द्वारा बनाई गई राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को गुजरात के व्यापारियों के चरणों में सौंप दिया गया है। उन्होंने पार्टी के नेताओं को लेकर भी तीखी टिप्पणी की।
अजित पवार के निधन के बाद NCP के सामने संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखने, वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी दूर करने और भविष्य की राजनीतिक दिशा तय करने की चुनौती है। आने वाले दिनों में पार्टी के नेतृत्व, वित्त मंत्रालय की मांग और दोनों गुटों के संभावित विलय को लेकर होने वाले फैसले महाराष्ट्र की राजनीति के लिए अहम हो सकते हैं।