विदेशी समर्थन के आरोप पर सियासी घमासान, किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी को दी नसीहत

कांग्रेस नेता राहुल गांधी की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर विदेशी मदद से सत्ता में आने और बने रहने की टिप्पणी के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि उच्चस्तरीय बहस गंभीर और परिपक्व लोगों के बीच होती है।

Knews Desk – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बीच विदेशी समर्थन को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री मोदी विदेशी मदद से सत्ता में आए और अब भी उसी के सहारे पद पर बने हुए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री को इस मुद्दे पर खुली बहस की चुनौती भी दी। इसके जवाब में केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए उनके बयान को लेकर सवाल उठाए।

रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए राहुल गांधी की तुलना उन लोगों से की, जो उनके मुताबिक विरोधाभासी रुख अपनाते हैं। उन्होंने लिखा कि भारत के विरोधियों के एजेंडे को आगे बढ़ाने का आरोप लगाते हुए दूसरों पर विदेशी समर्थन का आरोप लगाना खुद को हास्यास्पद स्थिति में डालने जैसा है। रिजिजू ने यह भी कहा कि उच्चस्तरीय बहस परिपक्व लोगों के बीच होती है।

राहुल गांधी ने पीएम मोदी को दी खुली बहस की चुनौती

राहुल गांधी ने 2 नवंबर को एक्स पर पोस्ट कर प्रधानमंत्री मोदी पर विदेशी मदद से सत्ता हासिल करने और पद पर बने रहने का आरोप लगाया था। उन्होंने यह भी दावा किया कि भारत की आर्थिक व्यवस्था विदेशी ताकतों के नियंत्रण और समर्थन में है तथा विदेशी सोशल मीडिया मंच प्रधानमंत्री के पक्ष में हैं।

राहुल गांधी ने इन मुद्दों पर प्रधानमंत्री को किसी भी मंच पर, किसी भी समय खुली बहस की चुनौती दी। उनके बयान प्रधानमंत्री मोदी की उस टिप्पणी के बाद आए, जिसमें उन्होंने विपक्ष पर देश के विकास में बाधा डालने और विदेशी ताकतों के समर्थन से देश में अस्थिरता पैदा करने के आरोप लगाए थे।

मोदी ने विपक्ष को बताया था ‘अवरोध पक्ष’

31 अक्टूबर को गुजरात के एकतानगर में राष्ट्रीय एकता दिवस कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा था कि विपक्ष को सरकार की नीतियों का विरोध करने के बजाय देश के विकास में बाधाएं पैदा करने से बचना चाहिए। उन्होंने विपक्ष को ‘विरोध पक्ष’ के बजाय ‘अवरोध पक्ष’ बताया था।

प्रधानमंत्री ने विदेशी दौरों और विदेश में होने वाली मुलाकातों का जिक्र करते हुए भी सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि कुछ ताकतें देश में भ्रम और अफवाह फैलाने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रही हैं।

चुनाव आयोग को लेकर भी आमने-सामने हैं बीजेपी और कांग्रेस

बीजेपी और कांग्रेस के बीच यह विवाद ऐसे समय बढ़ा है, जब चुनावी प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी दोनों पक्षों में तीखी बयानबाजी चल रही है। 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में हुई विपक्षी गठबंधन की रैली में राहुल गांधी ने चुनावी अनियमितताओं के आरोप लगाए थे और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।

राहुल गांधी ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों और मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठाए थे। वहीं, बीजेपी इन आरोपों को खारिज करते हुए कांग्रेस पर लोकतांत्रिक संस्थाओं पर अविश्वास पैदा करने का आरोप लगा रही है।

विदेशी समर्थन के आरोप और खुली बहस की चुनौती के बाद बीजेपी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव और तेज हो गया है। फिलहाल दोनों पक्ष एक-दूसरे के बयानों पर लगातार जवाब दे रहे हैं।

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