Knews Desk- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्रीय मंत्रियों के साथ समीक्षा बैठक में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय और सहयोग सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने मंत्रियों से कहा कि वे अपने-अपने विभागों से जुड़े राज्य सरकार के मंत्रियों के साथ नियमित बैठकें करें, ताकि योजनाओं और विकास कार्यों के क्रियान्वयन में आने वाली दिक्कतों को समय रहते दूर किया जा सके।
पीएम मोदी ने सुझाव दिया कि केंद्रीय मंत्री अपने विभाग से संबंधित राज्य के मंत्रियों के साथ क्षेत्रवार और सेक्टर आधारित बैठकें आयोजित करें। इन बैठकों के जरिए केंद्र और राज्यों के बीच संवाद को नियमित और व्यवस्थित बनाने की कोशिश की जाएगी।
प्रधानमंत्री ने इसके लिए जल शक्ति मंत्रालय के मॉडल का उदाहरण भी दिया। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने हाल ही में राज्यों के जल संसाधन मंत्रियों के साथ बैठक की थी, जिसमें विभिन्न राज्यों से जुड़े जल क्षेत्र के मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई थी।
दूसरे मंत्रालय भी अपनाएंगे मॉडल
पीएम मोदी ने अन्य मंत्रालयों को भी इसी तरह की बैठकें आयोजित करने की सलाह दी है। सूत्रों के मुताबिक, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय अगला ऐसा सम्मेलन आयोजित कर सकता है। इसके बाद पर्यावरण मंत्रालय भी इस तरह की बैठक करने पर विचार कर रहा है।
इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य केंद्र और राज्यों के बीच साझेदारी को मजबूत करना है, ताकि केंद्र की योजनाओं और विकास कार्यक्रमों को जमीन पर अधिक प्रभावी तरीके से लागू किया जा सके।
1-2 सितंबर को हुई थी जल संसाधन मंत्रियों की बैठक
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने 1 और 2 सितंबर को नई दिल्ली में राज्यों के जल संसाधन मंत्रियों के साथ दो दिवसीय बैठक की थी। इसमें जल से जुड़े बुनियादी ढांचे, जल स्रोतों की स्थिरता, ‘जल संचय जन भागीदारी’ और ‘जल जीवन मिशन 2.0’ जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई।
बैठक के अंतिम सत्र में राज्यों के मंत्रियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी संवाद किया। इस दौरान बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन भी मौजूद रहे।
सीधे संवाद से समस्याओं का निकलेगा समाधान
केंद्र और राज्य के मंत्रियों के बीच नियमित संवाद होने से परियोजनाओं की मंजूरी में देरी, फंड की कमी, जमीन से जुड़ी समस्याएं, विभागीय तालमेल और योजनाओं के क्रियान्वयन जैसी चुनौतियों पर सीधे चर्चा की जा सकेगी।
इसके अलावा राज्य सरकारें अपने सफल प्रयोगों और बेहतर काम करने के तरीकों को भी साझा कर सकेंगी। इन मॉडलों को जरूरत के अनुसार दूसरे राज्यों में लागू किया जा सकता है।
कुल मिलाकर, सरकार का प्रयास केंद्र और राज्यों के बीच संवाद को और मजबूत कर सहकारी संघवाद के जरिए विकास योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन की दिशा में आगे बढ़ने का है।