मायावती का सपा-कांग्रेस पर हमला, अशोक सिद्धार्थ के संन्यास पर किया बड़ा दावा

Knews Desk- बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि केवल नीले कपड़े पहनने या मंचों पर नीला रंग लगाने से कोई अंबेडकरवादी नहीं बन जाता. उन्होंने अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास लेने को लेकर भी कई दावे किए हैं.

बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने शुक्रवार को विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि सपा, कांग्रेस और अन्य पार्टियां बीएसपी के नीले रंग का इस्तेमाल करके खुद को बहुजन समाज का हितैषी बताने की कोशिश करती हैं. हालांकि, कपड़ों, गमछों और मंचों पर नीला रंग इस्तेमाल करने से किसी की जातिवादी, संकीर्ण, सामंतवादी और पूंजीवादी सोच नहीं बदल जाती.

मायावती ने कहा कि बहुजन समाज के वास्तविक हितों के लिए काम करने का दावा करने वाले दलों को पहले अपने दिल और दिमाग को साफ करना चाहिए. उन्होंने समाजवादी पार्टी के PDA गठबंधन और उसकी राजनीति पर भी सवाल उठाए.

बीएसपी प्रमुख ने आरोप लगाया कि दलितों, पिछड़ों, आदिवासियों और अन्य वंचित वर्गों के मुद्दों पर समाजवादी पार्टी की कथनी और करनी में अंतर रहा है. उन्होंने कहा कि इन वर्गों को लेकर सपा की सोच, चाल, चरित्र और चेहरा कथित तौर पर दोगला और बेईमान रहा है.

मायावती ने विपक्षी दलों पर अपना रुख बार-बार बदलने का आरोप लगाते हुए कहा कि बहुजन समाज के वास्तविक हितों की लड़ाई केवल बीएसपी ही लड़ती है. उन्होंने कहा कि अन्य दलों का उद्देश्य बहुजन समाज के हितों से अधिक राजनीतिक लाभ हासिल करना है.

निष्कासित नेताओं पर भी साधा निशाना

मायावती ने बीएसपी से अनुशासनहीनता और अन्य कारणों से निकाले गए नेताओं को लेकर भी विपक्षी दलों पर हमला किया. उन्होंने कहा कि पार्टी से निष्कासित होने के बाद कई नेता दूसरी पार्टियों में शामिल हो गए और लगातार अपना राजनीतिक ठिकाना बदलते रहे.

उन्होंने ऐसे नेताओं को अवसरवादी बताते हुए कहा कि जो लोग बार-बार पार्टियां बदलते हैं, वे किसी भी दल के लिए भरोसेमंद नहीं हो सकते. मायावती ने आरोप लगाया कि कुछ निष्कासित नेता दूसरी पार्टियों के इशारे पर छोटी-छोटी पार्टियां और संगठन खड़े कर लेते हैं.

छोटी पार्टियों की राजनीति पर सवाल

बीएसपी अध्यक्ष ने कहा कि ऐसी छोटी पार्टियां बहुजन समाज के सामूहिक हितों को पूरा नहीं कर सकतीं. उन्होंने दावा किया कि इनमें से कई दल बिना गठबंधन के चुनाव लड़ने की स्थिति में नहीं होते और किसी भी पार्टी की सरकार बनने पर सत्ता में शामिल होने से खुद को अलग नहीं रख पाते.

मायावती के मुताबिक, इस तरह की राजनीति से बहुजन समाज को कोई स्थायी लाभ नहीं मिलता. उन्होंने अपने समर्थकों से ऐसी पार्टियों और नेताओं से सावधान रहने की अपील की.

कांग्रेस पर निशाना साधते हुए मायावती ने कहा कि जो पार्टी बीएसपी से निष्कासित नेताओं को अपने साथ जोड़ने की बात कर रही है, वह खुद डूबते जहाज की तरह है. उन्होंने सवाल किया कि ऐसी पार्टी में शामिल होकर कोई अपना राजनीतिक भविष्य क्यों खराब करेगा.

मायावती ने बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर का हवाला देते हुए दावा किया कि उन्होंने अपने जीवनकाल में बहुजन समाज के लोगों को कांग्रेस से दूरी बनाए रखने की सलाह दी थी.

अशोक सिद्धार्थ के संन्यास पर मायावती का दावा

मायावती ने पूर्व बीएसपी नेता अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास लेने के मामले पर भी बड़ा दावा किया. उन्होंने कहा कि जिस दिन पार्टी ने अशोक सिद्धार्थ को राजनीति से संन्यास लेने की सलाह दी थी, उस दिन उन्होंने तुरंत संन्यास की घोषणा नहीं की थी.

मायावती के मुताबिक, अशोक सिद्धार्थ पर काफी दबाव था और उन्होंने संन्यास की घोषणा रोकने के लिए पूरी रात कथित तौर पर कई तरह के प्रयास किए. उन्होंने दावा किया कि जब इसमें सफलता नहीं मिली तो अगले दिन सुबह करीब 6:30 बजे अशोक सिद्धार्थ ने मजबूरी में संन्यास की घोषणा की.

मायावती के इन बयानों के बाद अब सपा, कांग्रेस और अशोक सिद्धार्थ की ओर से प्रतिक्रिया का इंतजार है. 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश की बहुजन राजनीति में इन बयानों का कितना असर पड़ता है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा.

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