इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 में कनेक्टेड कारों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और 5G तकनीक के जरिए भविष्य की बदलती तस्वीर देखने को मिली। डिजिटल तकनीक अब केवल मोबाइल और इंटरनेट तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवहन, उद्योग, रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नए सिरे से बदलने की क्षमता रखती है।
Knews Desk– कल्पना कीजिए कि ऑफिस जाते समय आपकी कार खुद ट्रैफिक जाम की जानकारी दे, रास्ते में किसी खतरे की आशंका होने पर अलर्ट करे और आपको कम समय में मंजिल तक पहुंचने का बेहतर विकल्प बताए। तकनीक की दुनिया में इस तरह की संभावनाएं तेजी से आकार ले रही हैं। कनेक्टेड कारों, स्मार्ट सड़कों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के मेल से आने वाले समय में सफर का तरीका पहले से काफी अलग हो सकता है।
दिल्ली के यशोभूमि में 7 से 10 अक्टूबर 2026 तक आयोजित इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) में तकनीक के इसी बदलते स्वरूप की झलक देखने को मिली। आयोजन के 10वें संस्करण की थीम ‘स्केल विदाउट बाउंड्रीज’ थी। इस बार स्मार्ट मोबिलिटी, रोबोटिक्स और हाईटेक स्टेडियम जैसी तकनीकों पर विशेष ध्यान दिया गया। उद्देश्य डिजिटल तकनीक को रोजमर्रा की जिंदगी और कामकाज के लिए अधिक उपयोगी बनाना है।
भारत में डिजिटल सेवाओं का विस्तार भी इस बदलाव को गति दे रहा है। कार्यक्रम का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया। उन्होंने बताया कि मोबाइल तकनीक ने यात्रा, बैंकिंग, शिक्षा और सरकारी योजनाओं तक लोगों की पहुंच आसान बनाई है। केंद्रीय दूरसंचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के मुताबिक, देश में मोबाइल उपयोगकर्ताओं की संख्या 135 करोड़ से अधिक और इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या 109 करोड़ से ज्यादा हो चुकी है। सरकार के अनुसार, देश के 99.9 प्रतिशत जिलों में 5.5 लाख से अधिक 5G बेस स्टेशन चालू हो चुके हैं। यह नेटवर्क नई डिजिटल सेवाओं और कनेक्टेड तकनीकों के विस्तार में अहम साबित हो सकता है।
आने वाले समय में गाड़ियों का इस्तेमाल भी मौजूदा तरीके से काफी अलग हो सकता है। कनेक्टेड कारें इंटरनेट और दूसरी गाड़ियों से मिलने वाली सूचनाओं के आधार पर ड्राइवर को ट्रैफिक, सड़क की स्थिति और संभावित दुर्घटनाओं के बारे में आगाह कर सकती हैं। इस तकनीक से ड्राइविंग को अधिक सुरक्षित बनाने और बेहतर रास्ता चुनने में मदद मिल सकती है।
इसी दिशा में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने अगस्त 2026 में व्हीकल-टू-व्हीकल (V2V) कम्युनिकेशन लागू करने के लिए नियमों का मसौदा जारी किया था। इस व्यवस्था के तहत गाड़ियां एक-दूसरे को अचानक ब्रेक लगाने या संभावित टक्कर जैसी परिस्थितियों की सूचना दे सकती हैं। इससे ड्राइवर को समय रहते सतर्क होने का मौका मिल सकता है।
तकनीक का असर ऑटोमोबाइल उद्योग के साथ फैक्ट्रियों में भी दिखाई देने लगा है। ऑटो कंसल्टेंसी JATO Dynamics के मुताबिक, जनवरी से अक्टूबर 2025 के बीच बिकने वाली नई गाड़ियों में 27.4 प्रतिशत कनेक्टेड थीं। इसके अलावा, AI और स्मार्ट सेंसर की मदद से मशीनों में आने वाली संभावित खराबियों का पहले ही पता लगाने की कोशिश की जा रही है। इससे उत्पादन की गुणवत्ता सुधारने, समय बचाने और कामकाज को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, AI का बढ़ता इस्तेमाल रोजगार के स्वरूप में भी बदलाव ला सकता है। AI एक्सपर्ट अभिषेक निगम के मुताबिक, नियमित और बार-बार किए जाने वाले कई काम ऑटोमेट हो सकते हैं। इससे कुछ मौजूदा नौकरियों पर असर पड़ने की आशंका है। दूसरी ओर, रोबोट चलाने, उनकी प्रोग्रामिंग करने और रखरखाव जैसे क्षेत्रों में नए अवसर पैदा हो सकते हैं। लेकिन ऑटोमेशन के कारण प्रभावित होने वाली प्रत्येक नौकरी के बदले नया रोजगार उपलब्ध हो जाएगा, इसकी गारंटी नहीं है।
ऐसे में तकनीक को अपनाने के साथ कर्मचारियों और युवाओं को नए कौशल सिखाना भी जरूरी होगा। अभिषेक निगम का मानना है कि कंपनियों को AI आधारित सिस्टम लागू करने के साथ कर्मचारियों की ट्रेनिंग पर भी निवेश करना चाहिए। युवाओं को केवल AI टूल्स की जानकारी देने के बजाय उनका व्यावहारिक इस्तेमाल सिखाना जरूरी है। फिलहाल सोशल मीडिया पर रील्स और शॉर्ट्स बनाने जैसे कामों में AI का उपयोग अधिक दिखाई देता है, लेकिन इसकी संभावनाएं इससे कहीं व्यापक हैं।
AI का फायदा बड़े शहरों और कंपनियों तक सीमित रखने के बजाय छोटे शहरों और गांवों तक पहुंचाना भी महत्वपूर्ण होगा। स्थानीय भाषाओं में सस्ती और आसानी से इस्तेमाल की जा सकने वाली AI सेवाएं उपलब्ध होने पर किसान फसलों से संबंधित सलाह ले सकते हैं। छोटे कारोबारी अपने उत्पादों और सेवाओं को अधिक ग्राहकों तक पहुंचाने में इन तकनीकों का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए बेहतर इंटरनेट कनेक्टिविटी, आसान डिजिटल टूल्स और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप सहायता की आवश्यकता होगी।
दूसरी तरफ, जैसे-जैसे गाड़ियां, मशीनें और दूसरे उपकरण नेटवर्क से जुड़ेंगे, डेटा सुरक्षा की चुनौतियां भी बढ़ेंगी। लोगों की लोकेशन और निजी जानकारी को सुरक्षित रखना जरूरी होगा। साथ ही, नेटवर्क में खराबी या तकनीकी समस्या आने पर वैकल्पिक व्यवस्था भी तैयार रखनी होगी, ताकि जरूरी सेवाएं प्रभावित न हों।
इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 में सामने आई तकनीकी संभावनाएं बताती हैं कि डिजिटल क्रांति अब मोबाइल फोन से आगे बढ़कर परिवहन, उद्योग और रोजगार के नए क्षेत्रों में प्रवेश कर रही है। हालांकि, इस बदलाव की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि तकनीक कितनी सुरक्षित, सुलभ और उपयोगी बनती है। AI और 5G का लाभ तभी व्यापक होगा, जब इनके जरिए लोगों की रोजमर्रा की मुश्किलें कम हों, युवाओं को नए कौशल मिलें और गांवों से लेकर बड़े शहरों तक विकास के अवसर बढ़ें।