डिजिटल डेस्क- उत्तर प्रदेश में होने वाले 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) अभी से पूरी ताकत के साथ तैयारियों में जुट गई है। अपने पारंपरिक कैडर वोट बैंक को दोबारा संगठित करने और जमीनी स्तर पर पकड़ मजबूत करने के लिए पार्टी ने बड़े फैसले लिए हैं। बसपा ने वेस्ट यूपी और दिल्ली से सटे गौतमबुद्ध नगर समेत 6 प्रमुख जिलों में सांगठनिक स्तर पर व्यापक फेरबदल किए हैं। इसके साथ ही पार्टी ने आगामी चुनाव के मद्देनजर दलित-मुस्लिम समीकरण के अलावा अपनी पुरानी सोशल इंजीनियरिंग (ब्राह्मण और ओबीसी समाज) पर भी विशेष ध्यान केंद्रित करना शुरू कर दिया है।
दिग्गज नेताओं को मिली बड़ी जिम्मेदारियां, कानपुर और मुरादाबाद में नए सेनापति
पार्टी को नए सिरे से खड़ा करने के लिए बसपा सुप्रीमो ने पुराने और कद्दावर चेहरों पर भरोसा जताया है। इसके तहत केंद्रीय कोऑर्डिनेटर रणधीर सिंह बेनीवाल के कंधों पर जिम्मेदारी बढ़ाते हुए उन्हें सहारनपुर के साथ-साथ अब मुरादाबाद मंडल का भी प्रभार सौंपा गया है। वहीं, कानपुर मंडल में पार्टी को मजबूत करने के लिए पूर्व एमएलसी भीमराव अम्बेडकर, पूर्व मंत्री गयाचरन दिनकर और पूर्व एमएलसी विजय प्रताप सिंह जैसे अनुभवी नेताओं को मोर्चे पर उतारा गया है ताकि खोई हुई जमीन वापस पाई जा सके।
अकबरपुर से मनोज वर्मा बने पहले उम्मीदवार, बसपा ने फूंका चुनावी बिगुल
इन सांगठनिक बदलावों और बैठकों के बीच बसपा ने चुनावी मैदान में बढ़त बनाने के लिए अपने पत्तों को खोलना भी शुरू कर दिया है। पार्टी ने कानपुर देहात की अकबरपुर विधानसभा सीट से मनोज वर्मा को अपना आधिकारिक प्रत्याशी घोषित कर दिया है। 2027 के महामुकाबले के लिए बसपा द्वारा घोषित यह पहला उम्मीदवार है, जिससे साफ संकेत मिलता है कि पार्टी इस बार प्रत्याशियों के चयन और रणनीति पर बहुत पहले से ही काम पूरा कर लेना चाहती है।
छिटके वोटरों को साधने और सोशल इंजीनियरिंग को धार देने की नई रणनीति
राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो बसपा का यह आक्रामक रुख केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि पार्टी से दूर हो चुके वोटर्स को वापस जोड़ने की एक सोची-समझी कवायद है। मायावती की नजर इस बार दलित-ओबीसी और ब्राह्मण गठजोड़ को दोबारा जिंदा करने पर है। संगठन और आगामी टिकट वितरण में इन वर्गों को बड़ी तवज्जो देकर बसपा खुद को सूबे में सत्ताधारी भाजपा और मुख्य विपक्षी दल सपा के सामने एक बेहद मजबूत और त्रिकोणीय विकल्प के रूप में स्थापित करने की कोशिश में है।