डिजिटल डेस्क- लखनऊ में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की सरगर्मियों के बीच केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने बड़ा सियासी ऐलान किया है। रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष अठावले ने कहा है कि उनकी पार्टी यूपी चुनाव में 25 सीटों पर उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रही है। उन्होंने साफ किया कि उनकी पहली प्राथमिकता राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की है, लेकिन अगर सीटों को लेकर सहमति नहीं बनती है तो उनकी पार्टी अकेले भी मैदान में उतरने से पीछे नहीं हटेगी। प्रेस कॉन्फ्रेंस में अठावले ने कहा कि RPI, NDA की सहयोगी पार्टी है और गठबंधन धर्म के तहत उनकी मांग है कि उत्तर प्रदेश में उन्हें 25 सीटें दी जाएं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “अगर हमारी मांग नहीं मानी जाती, तो हम अपने दम पर चुनाव लड़ेंगे।” इस बयान के बाद यूपी की सियासत में नई हलचल तेज हो गई है।
दलितों को दी जाएं पांच-पांच एकड़ जमीन- अठावले
अठावले ने सिर्फ चुनावी रणनीति ही नहीं, बल्कि सामाजिक मुद्दों को भी जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने मांग की कि प्रदेश के गांवों में दलित परिवारों को पांच-पांच एकड़ जमीन दी जाए, ताकि उन्हें रोजगार के लिए शहरों की ओर पलायन न करना पड़े। साथ ही उन्होंने दलित समाज के लिए सामुदायिक केंद्र बनाने की भी वकालत की। उन्होंने योगी आदित्यनाथ सरकार की तारीफ करते हुए कहा कि यूपी में “गुंडाराज खत्म हो गया है” और वर्षों पुराना राम मंदिर का मुद्दा भी सुलझ चुका है। अब सरकार को दलितों के आर्थिक सशक्तिकरण पर ध्यान देना चाहिए। अठावले ने बताया कि वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर अपनी मांगों को उनके सामने रखेंगे।
बिहार विधानसभा चुनाव में भी उतारे थे प्रत्याशी
राजनीतिक रूप से देखा जाए तो RPI का यह रुख NDA के लिए चुनौती और अवसर दोनों हो सकता है। अगर सीट बंटवारे पर सहमति बनती है तो गठबंधन मजबूत होगा, लेकिन असहमति की स्थिति में वोटों का बिखराव भी संभव है। गौरतलब है कि RPI ने हाल ही में अन्य राज्यों में भी चुनावी किस्मत आजमाई है। बिहार विधानसभा चुनाव में पार्टी ने तीन सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, जबकि तमिलनाडु में 18 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। हालांकि, 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में 31 सीटों पर लड़ने के बावजूद पार्टी को कोई सफलता नहीं मिली थी।