लिविंग विल पर महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला, अस्पतालों में बनेगा स्पेशल मेडिकल बोर्ड

गंभीर और असाध्य रोगियों के लाइफ सपोर्ट हटाने जैसे मामलों पर अब विशेषज्ञ डॉक्टरों की समिति लेगी फैसला, सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के तहत होगी पूरी प्रक्रिया

Knews Desk- महाराष्ट्र सरकार ने गंभीर और लाइलाज बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के इलाज से जुड़े मामलों में बड़ा कदम उठाया है। अब राज्य के सरकारी और निजी अस्पतालों में ‘लिविंग विल’ यानी Advance Directives से जुड़े मामलों के लिए विशेष मेडिकल बोर्ड गठित किए जाएंगे।

इस फैसले का मकसद ऐसे मरीजों के मामलों में लाइफ सपोर्ट, वेंटिलेटर या अन्य जीवनरक्षक उपचार जारी रखने अथवा हटाने के फैसलों को पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरा करना है।

लिविंग विल एक कानूनी दस्तावेज होता है, जिसमें कोई व्यक्ति पहले से अपनी इच्छा दर्ज कर सकता है कि अगर वह भविष्य में गंभीर बीमारी, कोमा या ऐसी स्थिति में पहुंच जाए जहां वह खुद निर्णय लेने में सक्षम न हो, तो उसके इलाज को लेकर क्या कदम उठाए जाएं।

सुप्रीम कोर्ट ने साल 2018 में लिविंग विल को मान्यता दी थी। कोर्ट के अनुसार, यह किसी व्यक्ति को सम्मानजनक मृत्यु का अधिकार देता है और इसे पैसिव यूथेनेशिया यानी प्राकृतिक मृत्यु की प्रक्रिया से जोड़ा गया है।

महाराष्ट्र सरकार ने अपने आदेश में हरीश राणा मामले का भी उल्लेख किया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद उन्हें लाइफ सपोर्ट और कृत्रिम भोजन हटाने की अनुमति दी गई थी। इसी के बाद राज्यों को मेडिकल बोर्ड बनाने के निर्देश दिए गए।

नए नियमों के अनुसार, सरकारी अस्पतालों में प्राथमिक और द्वितीय मेडिकल बोर्ड बनाए जाएंगे। इन बोर्ड में एनेस्थीसिया विशेषज्ञ, सर्जन, फिजिशियन और अन्य अनुभवी डॉक्टर शामिल होंगे।

वहीं निजी अस्पतालों में मेडिकल डायरेक्टर, क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ और संबंधित बीमारी के विशेषज्ञ डॉक्टरों की समिति बनाई जाएगी। जरूरत पड़ने पर बाहरी विशेषज्ञों को भी शामिल किया जा सकेगा।

सरकार ने सभी जिलों को विशेषज्ञ डॉक्टरों का पैनल तैयार करने के निर्देश दिए हैं, ताकि लिविंग विल से जुड़े मामलों में तुरंत मेडिकल बोर्ड बनाया जा सके।

महाराष्ट्र सरकार के इस फैसले से गंभीर मरीजों के उपचार से जुड़े संवेदनशील मामलों में प्रक्रिया ज्यादा स्पष्ट, कानूनी और व्यवस्थित होने की उम्मीद है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *