KNEWS DESK- कर्नाटक की राजनीति में आज बड़ा बदलाव होने जा रहा है। कांग्रेस नेता डी. के. शिवकुमार आज मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले हैं। पिछले सप्ताह सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद अब राज्य की कमान शिवकुमार के हाथों में आने जा रही है। शपथ ग्रहण समारोह शाम करीब 4 बजे आयोजित होगा, जिसमें कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता और विपक्षी दलों के प्रमुख चेहरे शामिल हो सकते हैं।
सूत्रों के मुताबिक, शिवकुमार के साथ फिलहाल सीमित संख्या में मंत्रियों को शपथ दिलाई जाएगी। पार्टी नेतृत्व बाद में कैबिनेट का विस्तार करेगा। कांग्रेस के भीतर मंत्रियों की दूसरी सूची को लेकर अभी भी मंथन जारी है और अंतिम मंजूरी आलाकमान के पास है।
नई सरकार में कई नए और पुराने चेहरों को शामिल किए जाने की चर्चा है। राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि सिद्धारमैया के बेटे यतींद्र और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के पुत्र प्रियांक खरगे को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। इसके अलावा कई वरिष्ठ नेताओं के समर्थक भी अपने-अपने नेताओं के लिए कैबिनेट में स्थान सुनिश्चित कराने की कोशिशों में जुटे हैं।
नई सरकार में उपमुख्यमंत्री पद को लेकर तस्वीर अभी साफ नहीं है। कांग्रेस के भीतर दो डिप्टी सीएम बनाए जाने के प्रस्ताव पर विचार चल रहा है, लेकिन अंतिम फैसला नहीं हुआ है। पार्टी के कुछ नेताओं का मानना है कि अलग-अलग सामाजिक वर्गों के बीच संतुलन बनाने के लिए यह फैसला आसान नहीं होगा।
दलित समुदाय से आने वाले जी. परमेश्वर और प्रियांक खरगे को संभावित दावेदार माना जा रहा है। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि डी. के. शिवकुमार फिलहाल अपनी सरकार में किसी भी उपमुख्यमंत्री की नियुक्ति के पक्ष में नहीं हैं।
नई कैबिनेट में कृष्णा बायरेगौड़ा, दिनेश गुंडू राव और यू.टी. खादर जैसे नेताओं के नाम भी चर्चा में हैं। कांग्रेस महिला प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखते हुए एक महिला मंत्री को भी शामिल कर सकती है। हालांकि, मंत्रिपरिषद की अधिकतम सीमा को देखते हुए सभी दावेदारों को संतुष्ट करना पार्टी के लिए चुनौती बना हुआ है।
शपथ ग्रहण समारोह में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे मौजूद रहेंगे। इसके अलावा कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री, तमिलनाडु और झारखंड के मुख्यमंत्री तथा कई वरिष्ठ विपक्षी नेता भी कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं।
कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन के साथ अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि डी. के. शिवकुमार अपनी नई टीम में किन नेताओं को जगह देते हैं और राज्य की राजनीति में शक्ति संतुलन कैसे स्थापित करते हैं।