श्रीनगर 1996 हिंसा केस: NIA का बड़ा एक्शन, हुर्रियत के 6 नेताओं पर चार्जशीट; पुलिस फायरिंग और साजिश के आरोप

Knews Desk- जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में वर्ष 1996 में हुई हिंसा के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने बड़ी कार्रवाई की है। एनआईए ने इस मामले में हुर्रियत कॉन्फ्रेंस से जुड़े छह वरिष्ठ अलगाववादी नेताओं के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। इन नेताओं पर भीड़ हिंसा भड़काने, पुलिसकर्मियों पर हमले और आपराधिक साजिश में शामिल होने के आरोप लगाए गए हैं।

एनआईए ने शुक्रवार को जम्मू स्थित विशेष एनआईए अदालत में दाखिल चार्जशीट में शब्बीर अहमद शाह, सैयद अली शाह गिलानी, अब्दुल गनी लोन, मोहम्मद याकूब वकील, जावेद अहमद मीर और शकील अहमद बख्शी के नाम शामिल किए हैं। जांच एजेंसी ने इन सभी पर आपराधिक साजिश, हत्या के प्रयास, दंगा फैलाने और सरकारी कर्मचारियों पर हमला करने जैसी धाराओं के तहत आरोप लगाए हैं। इसके अलावा गैर-कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA की धारा 13 के तहत भी कार्रवाई की गई है।

हालांकि सैयद अली शाह गिलानी, अब्दुल गनी लोन और मोहम्मद याकूब वकील की मृत्यु हो चुकी है, इसलिए उनके खिलाफ आगे की कानूनी प्रक्रिया प्रभावित होगी। लेकिन एनआईए ने चार्जशीट में यह उल्लेख किया है कि जांच के दौरान मिले सबूतों के आधार पर इन नेताओं की कथित भूमिका आपराधिक साजिश और हिंसा के लिए जुटाई गई भीड़ के साझा उद्देश्य में सामने आई है। जांच एजेंसी के अनुसार, यह मामला 17 जुलाई 1996 को श्रीनगर के नाज क्रॉसिंग इलाके में हुई हिंसा से जुड़ा है। उस समय आतंकी हिलाल अहमद बेग के अंतिम संस्कार के जुलूस के दौरान बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए थे। एनआईए का आरोप है कि हुर्रियत नेताओं ने इस जुलूस का नेतृत्व किया और इसी दौरान स्थिति हिंसक हो गई।

एनआईए के मुताबिक, जुलूस में शामिल भीड़ के बीच हथियारबंद आतंकवादी भी मौजूद थे, जिन्होंने पुलिसकर्मियों पर फायरिंग की। इस गोलीबारी में कई पुलिस अधिकारी घायल हुए थे। इसके अलावा प्रदर्शनकारियों ने भारी पत्थरबाजी की, जिससे सरकारी वाहनों और सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचा। एनआईए की जांच में यह दावा किया गया है कि आरोपियों ने कथित तौर पर भारत विरोधी और अलगाववादी नारे लगाए तथा लोगों को हिंसा के लिए उकसाने का काम किया। एजेंसी का कहना है कि इस पूरी घटना के पीछे एक सुनियोजित साजिश थी, जिसका उद्देश्य अलगाववादी गतिविधियों को बढ़ावा देना, सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित करना और कानून लागू करने वाली एजेंसियों के खिलाफ माहौल तैयार करना था।

इस मामले में हिंसा के दिन ही श्रीनगर के शेरगढ़ी पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई थी। बाद में केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर एनआईए ने अप्रैल 2026 में इस मामले की जांच अपने हाथ में ली। एजेंसी ने जांच के दौरान जुटाए गए दस्तावेजों, गवाहों के बयान और अन्य सबूतों के आधार पर यह चार्जशीट दाखिल की है। एनआईए की कार्रवाई को जम्मू-कश्मीर में पुराने हिंसा मामलों पर दोबारा सख्ती के तौर पर देखा जा रहा है। अब अदालत में इस मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया चलेगी, जहां आरोपों और सबूतों पर विचार किया जाएगा।

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