श्रीनगर के सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी के नेशनल कॉन्फ्रेंस छोड़ने और लोकसभा से इस्तीफा देने के संभावित ऐलान की खबरों से जम्मू-कश्मीर की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। दूसरी ओर, पार्टी के 25 विधायकों ने नेतृत्व को 14 दिन का अल्टीमेटम दिया है और मांगें पूरी नहीं होने पर सरकार से समर्थन वापस लेने की चेतावनी दी है।
Knews Desk – जम्मू-कश्मीर में सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के सामने राजनीतिक चुनौती बढ़ती दिखाई दे रही है। श्रीनगर से सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी के पार्टी छोड़ने और लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफे का ऐलान करने की संभावना जताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, वह बडगाम में अपने पिता आगा सैयद मेहदी की 26वीं पुण्यतिथि पर आयोजित जनसभा में इस संबंध में घोषणा कर सकते हैं।
रुहुल्लाह मेहदी ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और नेशनल कॉन्फ्रेंस प्रमुख फारूक अब्दुल्ला पर आरोप लगाया है कि वे 2024 के विधानसभा चुनाव के दौरान अनुच्छेद 370 को लेकर किए गए वादों से पीछे हट रहे हैं। हालांकि, उनके इस्तीफे की औपचारिक घोषणा की पुष्टि होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
अनुच्छेद 370 पर वादों को लेकर नाराजगी
आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी बडगाम से तीन बार विधायक रह चुके हैं। वर्ष 2024 में वह श्रीनगर लोकसभा सीट से सांसद चुने गए थे। रिपोर्ट के मुताबिक, अनुच्छेद 370 के मुद्दे पर पार्टी नेतृत्व के रुख को लेकर उनकी नाराजगी बढ़ी है। उन्होंने उमर अब्दुल्ला और फारूक अब्दुल्ला पर चुनावी वादों से पीछे हटने का आरोप लगाया है।
नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर असंतोष की खबरें भी सामने आई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी के 25 विधायकों ने नेतृत्व को 14 दिन का अल्टीमेटम दिया है। विधायकों ने चेतावनी दी है कि उनकी मांगें पूरी नहीं होने पर वे सरकार से समर्थन वापस लेने का कदम उठा सकते हैं।
रुहुल्लाह मेहदी के संभावित फैसले और विधायकों की नाराजगी से नेशनल कॉन्फ्रेंस के लिए राजनीतिक दबाव बढ़ सकता है। एक ओर पार्टी नेतृत्व को अनुच्छेद 370 से जुड़े चुनावी वादों पर उठ रहे सवालों का सामना करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर विधायकों की चेतावनी सरकार के समर्थन को लेकर अनिश्चितता पैदा कर सकती है।
फिलहाल, रुहुल्लाह मेहदी के संभावित इस्तीफे और विधायकों के अल्टीमेटम पर आगे की स्थिति उनके आधिकारिक ऐलान और पार्टी नेतृत्व की प्रतिक्रिया के बाद स्पष्ट होगी।