अमेरिकी हथियारों के इस्तेमाल का आरोप, बलूच नेताओं ने वॉशिंगटन से पाकिस्तान की सैन्य मदद रोकने की अपील की है
Knews Desk- पाकिस्तान के बलूचिस्तान में कथित सैन्य कार्रवाई को लेकर अब अमेरिका की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। बलूच संगठनों और नेताओं का आरोप है कि पाकिस्तान ने बलूच नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई में अमेरिका निर्मित F-16 लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल किया। उनका दावा है कि इन हमलों में आम नागरिकों, महिलाओं और बच्चों की भी जान गई।
बलूच नेतृत्व ने इस मामले में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन से सीधे हस्तक्षेप की मांग की है। नेताओं का सवाल है कि अगर अमेरिकी हथियारों का इस्तेमाल नागरिकों के खिलाफ हो रहा है तो वॉशिंगटन इस पर अब तक सार्वजनिक तौर पर कोई कड़ा रुख क्यों नहीं अपना रहा है।
बलूच संगठनों का कहना है कि पाकिस्तान को आतंकवाद विरोधी अभियानों के नाम पर मिलने वाली सैन्य क्षमता का इस्तेमाल बलूचिस्तान में दमन के लिए किया जा रहा है। इसी कड़ी में अमेरिकी F-16 विमानों के इस्तेमाल का आरोप लगाया गया है।
बलूच नेताओं का दावा है कि ऐसी कार्रवाई पहले भी पाकिस्तान के अन्य अशांत इलाकों में देखने को मिली है। उनका कहना है कि अमेरिकी सैन्य उपकरणों के इस्तेमाल के कारण अब अमेरिका की जवाबदेही का सवाल भी उठता है।
ट्रंप प्रशासन से क्या मांग कर रहे बलूच नेता?
बलूच नेता मीर यार बलूच समेत अन्य नेताओं ने अमेरिकी प्रशासन के सामने कई मांगें रखी हैं। इनमें पाकिस्तान को दी जा रही सैन्य सहायता की समीक्षा और जरूरत पड़ने पर उसे रोकना प्रमुख है।
उनकी मांग है कि पाकिस्तान के F-16 बेड़े के लिए अमेरिका की ओर से मिलने वाले स्पेयर पार्ट्स, तकनीकी सहायता, मरम्मत और अपग्रेड से जुड़ी सुविधाओं पर भी रोक लगाई जाए।
इसके अलावा बलूच नेतृत्व पाकिस्तान पर नागरिकों के खिलाफ कथित मानवाधिकार उल्लंघनों और युद्ध अपराधों के आरोपों की अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग कर रहा है।
पाकिस्तान को आतंक प्रायोजक घोषित करने की मांग
बलूच नेताओं ने अमेरिका से पाकिस्तान के खिलाफ आर्थिक और कूटनीतिक दबाव बढ़ाने की अपील भी की है। उनकी मांग है कि पाकिस्तान को आतंकवाद प्रायोजित करने वाले देश के तौर पर घोषित करने की दिशा में कदम उठाए जाएं और कथित सैन्य कार्रवाई के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो।
बलूच नेतृत्व अब इस मामले को सिर्फ पाकिस्तान तक सीमित नहीं रखना चाहता। नेताओं ने अमेरिका के साथ-साथ अफगानिस्तान और दूसरे देशों से भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बलूचिस्तान के मुद्दे को उठाने की अपील की है।
उनका कहना है कि नागरिकों के खिलाफ कथित हिंसा पर वैश्विक समुदाय को हस्तक्षेप करना चाहिए और पाकिस्तान पर जवाबदेही तय करने के लिए दबाव बनाया जाना चाहिए।
अब ट्रंप प्रशासन के रुख पर नजर
बलूचिस्तान में कथित एयरस्ट्राइक को लेकर ट्रंप प्रशासन की प्रतिक्रिया पर अब निगाहें टिकी हैं। बलूच नेताओं का आरोप है कि अमेरिकी हथियारों के इस्तेमाल के बावजूद वॉशिंगटन की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है।
अब देखना होगा कि अमेरिका पाकिस्तान के साथ अपने सैन्य संबंधों को लेकर कोई समीक्षा करता है या नहीं और बलूचिस्तान में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों पर ट्रंप प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आती है।