पाकिस्तान के बहावलपुर में जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख ठिकाने मरकज सुभान अल्लाह के फिर से सक्रिय होने की खबर सामने आई है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय हमलों में इस परिसर को भारी नुकसान पहुंचा था।
Knews Desk- आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने पाकिस्तान के बहावलपुर स्थित अपने प्रमुख ठिकाने मरकज सुभान अल्लाह को कथित तौर पर दोबारा तैयार कर लिया है। रिपोर्टों के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय हमलों में क्षतिग्रस्त हुआ यह परिसर अब फिर से सक्रिय नजर आ रहा है।
बहावलपुर के N-5 नेशनल हाईवे पर स्थित जामिया सुभान अल्लाह कॉम्प्लेक्स लंबे समय से जैश-ए-मोहम्मद के अहम केंद्र के तौर पर जाना जाता रहा है। इसे संगठन के वैचारिक और ऑपरेशनल गतिविधियों के साथ-साथ ट्रेनिंग से भी जोड़ा जाता रहा है।
मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बहावलपुर जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े प्रमुख ठिकानों में शामिल था, जिसे भारतीय हमलों में निशाना बनाया गया था। हमले में परिसर की इमारतों और गुंबदों को भारी नुकसान पहुंचा था।
जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर ने उस समय दावा किया था कि हमले में उसके परिवार के कई सदस्य और संगठन से जुड़े लोग मारे गए। मसूद अजहर भारत में कई आतंकी हमलों के मामलों में वांछित है और संयुक्त राष्ट्र की आतंकवादी सूची में भी शामिल है।
फिर दिखने लगीं गतिविधियां
अब सामने आई जानकारी के मुताबिक, परिसर के क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत की गई है। खास तौर पर मस्जिद के गुंबदों को दोबारा तैयार किए जाने की बात सामने आई है। नई मरम्मत वाले हिस्सों का रंग पुराने ढांचे से अलग दिखाई दे रहा है, जिससे हाल में किए गए निर्माण का संकेत मिलता है।
रिपोर्टों के अनुसार, परिसर में दोबारा गतिविधियां भी दिखाई देने लगी हैं। इससे यह आशंका बढ़ी है कि जैश-ए-मोहम्मद अपने इस प्रमुख केंद्र को फिर से ऑपरेशनल बनाने की कोशिश कर रहा है।
डिजिटल वॉलेट के जरिए फंड जुटाने का दावा
सूत्रों के मुताबिक, जैश से जुड़े सोशल मीडिया अकाउंट्स पर बहावलपुर स्थित परिसर के पुनर्निर्माण के लिए कथित तौर पर फंड जुटाने की मुहिम भी चलाई गई थी। डिजिटल वॉलेट के जरिए आर्थिक मदद जुटाने की कोशिश किए जाने की बात सामने आई है।
सैटेलाइट इमेजरी और हालिया गतिविधियों के आधार पर परिसर में हुए पुनर्निर्माण का आकलन किया जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 के शुरुआती महीनों में साइट पर निर्माण और मरम्मत से जुड़ी गतिविधियां दिखाई दीं।
इस घटनाक्रम ने एक बार फिर पाकिस्तान में मौजूद जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी ढांचे और उसके खिलाफ कार्रवाई को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।