ऑस्ट्रेलिया क्यों है दुनिया का ‘मिनरल पावरहाउस’? जानिए किन खनिजों से भरती है उसकी तिजोरी

Knews Desk– प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 8 से 10 जुलाई तक ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर हैं। इस दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार, रणनीतिक साझेदारी, ऊर्जा सुरक्षा और महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। भारत के लिए ऑस्ट्रेलिया केवल एक रणनीतिक साझेदार ही नहीं, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर ऐसा देश भी है, जिसकी खनिज संपदा उसे दुनिया की सबसे मजबूत अर्थव्यवस्थाओं में शामिल करती है। विशाल भूमि, कम आबादी और बेशकीमती खनिजों के भंडार ने ऑस्ट्रेलिया को वैश्विक खनन उद्योग का प्रमुख केंद्र बना दिया है।ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्था में खनन क्षेत्र की अहम भूमिका है। देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) और निर्यात में खनिजों का बड़ा योगदान है। यहां से हर साल अरबों डॉलर मूल्य के लौह अयस्क, कोयला, सोना, प्राकृतिक गैस, लिथियम और यूरेनियम जैसे संसाधनों का निर्यात किया जाता है। यही कारण है कि ऑस्ट्रेलिया को दुनिया की खनिज महाशक्ति भी कहा जाता है।

ऑस्ट्रेलिया दुनिया के सबसे बड़े लौह अयस्क (Iron Ore) उत्पादकों में शामिल है। पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया का पिलबारा क्षेत्र लौह अयस्क के विशाल भंडार के लिए प्रसिद्ध है। चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और भारत समेत कई देशों को यहां से बड़ी मात्रा में लौह अयस्क निर्यात किया जाता है। स्टील उद्योग के लिए यह खनिज बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है और ऑस्ट्रेलिया की कमाई का बड़ा हिस्सा इसी से आता है।आज के दौर में लिथियम सबसे अधिक चर्चा में रहने वाला खनिज है। इलेक्ट्रिक वाहनों (EV), मोबाइल फोन, लैपटॉप और ऊर्जा भंडारण के लिए इस्तेमाल होने वाली बैटरियों में लिथियम की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऑस्ट्रेलिया दुनिया के सबसे बड़े लिथियम उत्पादक देशों में शामिल है। यही वजह है कि भविष्य की हरित ऊर्जा (Green Energy) की दौड़ में उसकी भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है। भारत भी अपनी इलेक्ट्रिक वाहन नीति और बैटरी निर्माण के लिए ऑस्ट्रेलिया के साथ सहयोग बढ़ा रहा है।सोने के मामले में भी ऑस्ट्रेलिया दुनिया के प्रमुख देशों में गिना जाता है। यहां की कई बड़ी सोने की खदानें हर साल बड़ी मात्रा में उत्पादन करती हैं। सोना केवल आभूषण उद्योग ही नहीं, बल्कि निवेश और विदेशी मुद्रा भंडार के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण धातु है। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया हीरे (Diamonds) और निकल (Nickel) जैसे खनिजों का भी बड़ा उत्पादक है, जिनका उपयोग आभूषण, इलेक्ट्रॉनिक्स और औद्योगिक उत्पादों में किया जाता है।

ऊर्जा संसाधनों की बात करें तो ऑस्ट्रेलिया के पास यूरेनियम के भी विशाल भंडार हैं। यूरेनियम का उपयोग परमाणु ऊर्जा उत्पादन में किया जाता है और ऑस्ट्रेलिया इस क्षेत्र में दुनिया के प्रमुख निर्यातकों में शामिल है। हालांकि देश में परमाणु ऊर्जा संयंत्र सीमित हैं, लेकिन यूरेनियम का निर्यात उसकी अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण आय का स्रोत है। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया प्राकृतिक गैस (LNG) और कोयले के निर्यात में भी अग्रणी देशों में शामिल है, जिससे उसे वैश्विक ऊर्जा बाजार में मजबूत स्थिति मिली है।खनिज संपदा के कारण ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्था को लगातार मजबूती मिल रही है। खनन उद्योग लाखों लोगों को रोजगार देता है और देश के निर्यात का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है। वैश्विक बाजार में खनिजों की बढ़ती मांग ने ऑस्ट्रेलिया को निवेशकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना दिया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान महत्वपूर्ण खनिजों और स्वच्छ ऊर्जा सहयोग पर भी विशेष जोर रहने की संभावना है। भारत इलेक्ट्रिक वाहनों, सेमीकंडक्टर, बैटरी निर्माण और ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे में लिथियम, निकल, कोबाल्ट और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों की स्थिर आपूर्ति भारत के लिए बेहद अहम है। ऑस्ट्रेलिया इस जरूरत को पूरा करने वाला भरोसेमंद साझेदार बनकर उभर रहा है।

कुल मिलाकर, ऑस्ट्रेलिया की धरती में छिपे लिथियम, गोल्ड, लौह अयस्क, यूरेनियम, प्राकृतिक गैस और अन्य बहुमूल्य खनिज ही उसकी आर्थिक ताकत की सबसे बड़ी वजह हैं। यही प्राकृतिक संपदा उसे वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाती है और दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक महत्वपूर्ण साझेदार भी।

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