देहरादून में दृष्टिबाधित छात्रों का प्रदर्शन, 5 दिन से धरने पर बैठे; बोले- मांगें पूरी होने तक संघर्ष जारी रहेगा

देहरादून के राष्ट्रीय दृष्टिबाधित संस्थान (NIVH) के छात्र पिछले पांच दिनों से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। छात्रों ने भोजन की गुणवत्ता, किताबों की बढ़ती कीमतों और संस्थान की व्यवस्थाओं में सुधार की मांग उठाई है।

Knews Desk- उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में राष्ट्रीय दृष्टिबाधित संस्थान (NIVH) के छात्र पिछले पांच दिनों से धरने पर बैठे हैं। छात्रों का कहना है कि संस्थान में लंबे समय से कई बुनियादी समस्याएं बनी हुई हैं, लेकिन बार-बार शिकायत करने के बावजूद इनका समाधान नहीं किया गया। इसके बाद छात्रों ने आंदोलन का रास्ता अपनाया।

छात्रों का आरोप है कि उन्हें लंबे समय से खराब गुणवत्ता का भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके अलावा पढ़ाई के लिए जरूरी किताबों की कीमतों और संस्थान की अन्य व्यवस्थाओं को लेकर भी विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

आंदोलन कर रहे छात्रों के मुताबिक, उन्होंने कई बार संस्थान के अधिकारियों के सामने अपनी समस्याएं रखीं। इतना ही नहीं, अपनी मांगों और परेशानियों को लेकर केंद्र और राज्य सरकार को भी बड़ी संख्या में पत्र और ईमेल भेजे गए। हालांकि, छात्रों का दावा है कि लगातार शिकायतों के बावजूद उन्हें कोई ठोस समाधान नहीं मिला।

भोजन और किताबों को लेकर नाराजगी

छात्रों का कहना है कि जब बातचीत और शिकायत के जरिए समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो उन्हें धरने पर बैठने का फैसला लेना पड़ा। उनका दावा है कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल या राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित नहीं है, बल्कि वे अपनी शिक्षा, सुविधाओं और अधिकारों के लिए आवाज उठा रहे हैं।

दृष्टिबाधित छात्रों ने संस्थान में मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि भोजन की गुणवत्ता में सुधार किया जाना जरूरी है। इसके साथ ही किताबों की कीमतों को लेकर भी छात्रों ने राहत की मांग की है।

छात्रों का कहना है कि शिक्षा से जुड़ी आवश्यक सुविधाएं उनके लिए सुलभ और उचित कीमत पर उपलब्ध होनी चाहिए। संस्थान में मौजूद दूसरी व्यवस्थागत समस्याओं को भी जल्द दूर करने की मांग की गई है।

बोले- दृष्टिबाधित होना अधिकारों से वंचित होने की वजह नहीं

आंदोलन कर रहे छात्रों का कहना है कि दृष्टिबाधित होना उनके अधिकारों को कम नहीं करता। उन्हें भी बेहतर शिक्षा, अच्छी सुविधाएं और सम्मानजनक माहौल मिलना चाहिए। छात्रों का कहना है कि यदि उनकी समस्याओं पर समय रहते ध्यान दिया जाता तो उन्हें आंदोलन करने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ता।

पांच दिनों से जारी इस आंदोलन के बाद अब छात्रों की नजर संस्थान प्रशासन और सरकार की प्रतिक्रिया पर है। छात्रों को उम्मीद है कि उनकी मांगों पर अधिकारियों के साथ बातचीत होगी और समस्याओं का स्थायी समाधान निकाला जाएगा।

फिलहाल बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन छात्रों से बातचीत कर उनकी मांगों को पूरा करने की दिशा में कदम उठाएगा या फिर यह आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।