यह मेरी पहचान है…… अजमेर RE-NEET परिक्षा केंद्र में बुर्का-हिजाब को लेकर हंगामा

Knews Desk- अजमेर में RE-NEET परीक्षा के दौरान उस समय हंगामे की स्थिति बन गई जब एक छात्रा को बुर्का और हिजाब पहनकर परीक्षा केंद्र में प्रवेश को लेकर रोक दिया गया। यह मामला सावित्री गर्ल्स स्कूल परीक्षा केंद्र का है, जहां प्रवेश प्रक्रिया के दौरान केंद्र प्रशासन और छात्रा-परिजनों के बीच तीखी बहस देखने को मिली।

जानकारी के अनुसार, ब्यावर से परीक्षा देने पहुंची अभ्यर्थी उम्मे कुलसुम जब परीक्षा केंद्र पर पहुंचीं, तो सुरक्षा जांच के दौरान उनके बुर्के को लेकर आपत्ति जताई गई। केंद्र प्रशासन ने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि सुरक्षा जांच के लिए चेहरे और शरीर की उचित जांच आवश्यक है, जिसके कारण अतिरिक्त प्रक्रिया अपनाई जानी थी।

इस पर छात्रा और उनके परिजनों ने कड़ा विरोध जताया। उम्मे कुलसुम ने कहा कि बुर्का उनकी धार्मिक और व्यक्तिगत पहचान का हिस्सा है और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के नियमों के अनुसार यदि कोई उम्मीदवार धार्मिक पोशाक पहनकर आता है तो उसे समय से पहले पहुंचकर जांच प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने सभी निर्देशों का पालन किया, इसके बावजूद उन्हें रोका गया।

छात्रा के पिता मोहम्मद आलिम ने भी केंद्र प्रशासन के रवैये पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी इससे पहले भी बुर्का पहनकर परीक्षा दे चुकी है और तब किसी तरह की परेशानी नहीं हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि NTA द्वारा अनुमति दिए जाने के बावजूद केंद्र स्तर पर अलग नियम लागू किए जा रहे हैं। पिता ने यह भी कहा कि वे पूरी सुरक्षा जांच के लिए तैयार हैं, लेकिन उनकी बेटी को बुर्का हटाने के लिए मजबूर करना स्वीकार नहीं है।

घटना के बाद केंद्र के बाहर कुछ देर के लिए तनाव की स्थिति बनी रही और दोनों पक्षों के बीच बहस बढ़ गई। हालांकि मौके पर मौजूद अधिकारियों ने स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया और परीक्षा प्रक्रिया को सुचारु रूप से आगे बढ़ाने की कोशिश की।

परीक्षा से जुड़े नियमों के अनुसार, सुरक्षा जांच के दौरान किसी भी प्रकार की पोशाक जो जांच में बाधा डाल सकती है, उसके लिए अतिरिक्त समय और प्रक्रिया निर्धारित की जाती है। इसी को लेकर केंद्र प्रशासन और अभ्यर्थी पक्ष के बीच मतभेद सामने आया। इस पूरे मामले ने एक बार फिर परीक्षा केंद्रों पर ड्रेस कोड और धार्मिक पोशाक को लेकर नियमों के सख्त पालन और उसके क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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