NEET PG 2026: 800 अंकों से लेकर रैंक तक, जानें कैसे तय होता है स्कोर और टाई-ब्रेकिंग नियम

Knews Desk: NEET PG 2026 में शामिल मेडिकल उम्मीदवारों के लिए परीक्षा की मार्किंग स्कीम और रैंक तैयार करने के नियमों को समझना बेहद जरूरी है। नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) की ओर से आयोजित इस परीक्षा के जरिए उम्मीदवारों को MD, MS, PG डिप्लोमा और अन्य पोस्ट-एमबीबीएस कोर्स में दाखिले का अवसर मिलता है। परीक्षा में उम्मीदवारों का प्रदर्शन उनके सही और गलत उत्तरों के आधार पर तय होता है। वहीं, दो या उससे अधिक उम्मीदवारों के अंक समान होने पर रैंक निर्धारित करने के लिए टाई-ब्रेकिंग नियम लागू किए जाते हैं।

NEET PG 2026 में कुल 200 बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाते हैं और परीक्षा कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) मोड में होती है। उम्मीदवारों को पूरे पेपर को हल करने के लिए 3 घंटे 30 मिनट का समय मिलता है। प्रत्येक सही उत्तर के लिए 4 अंक दिए जाते हैं, जबकि गलत उत्तर देने पर 1 अंक की नेगेटिव मार्किंग होती है। किसी सवाल का जवाब नहीं देने पर न तो अंक मिलते हैं और न ही अंक काटे जाते हैं। इस तरह परीक्षा का अधिकतम संभावित स्कोर 800 अंक होता है।उदाहरण के लिए, अगर किसी उम्मीदवार ने 150 प्रश्नों के सही उत्तर दिए हैं और 30 प्रश्न गलत किए हैं, जबकि 20 प्रश्न छोड़ दिए हैं, तो सही उत्तरों के लिए उसे 600 अंक मिलेंगे। वहीं, 30 गलत उत्तरों के कारण 30 अंक काटे जाएंगे। इस तरह उम्मीदवार का कुल स्कोर 570 अंक होगा। इससे साफ है कि परीक्षा में ज्यादा सवाल हल करने के साथ-साथ गलत उत्तरों की संख्या कम रखना भी बेहद जरूरी है।

NEET PG में नेगेटिव मार्किंग होने के कारण उम्मीदवारों को प्रश्न हल करते समय सावधानी बरतनी चाहिए। किसी ऐसे सवाल का उत्तर देने पर, जिसके बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं है, गलत होने की स्थिति में एक अंक का नुकसान हो सकता है। इसके विपरीत, सवाल छोड़ने पर कोई अंक नहीं काटा जाता। इसलिए उम्मीदवारों के लिए सटीकता और सही प्रश्नों का चयन स्कोर बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है।परीक्षा के बाद उम्मीदवारों की रैंक मुख्य रूप से उनके प्रदर्शन और प्राप्त स्कोर के आधार पर निर्धारित होती है। हालांकि, जब दो या उससे अधिक उम्मीदवारों के अंक समान होते हैं, तब टाई-ब्रेकिंग नियम लागू किए जाते हैं। ऐसी स्थिति में उम्मीदवारों की गलत उत्तरों की संख्या जैसे निर्धारित मानदंडों को देखा जा सकता है। समान अंक होने पर कम गलत उत्तर देने वाले उम्मीदवार को बेहतर रैंक मिलने की स्थिति बन सकती है।

अगर टाई इसके बाद भी बनी रहती है, तो निर्धारित अन्य मानदंडों के आधार पर रैंक तय की जाती है। इनमें उम्मीदवार की उम्र और MBBS परीक्षा में प्राप्त अंकों जैसे विवरण भी शामिल हो सकते हैं। इसलिए NEET PG की रैंकिंग को समझने के लिए केवल कुल स्कोर देखना पर्याप्त नहीं है। टाई की स्थिति में लागू होने वाले नियम भी उम्मीदवार की अंतिम रैंक पर असर डाल सकते हैं।उम्मीदवारों को परीक्षा की तैयारी के दौरान मार्किंग स्कीम को ध्यान में रखते हुए मॉक टेस्ट और प्रैक्टिस पेपर हल करने चाहिए। सही उत्तरों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ गलतियों को कम करना भी जरूरी है। खासकर जब कई उम्मीदवारों के अंक एक-दूसरे के काफी करीब हों, तब कुछ गलत उत्तर रैंक में बड़ा अंतर पैदा कर सकते हैं। इसलिए NEET PG 2026 में बेहतर रैंक के लिए सटीकता, समय प्रबंधन और प्रश्नों का सही चयन बेहद महत्वपूर्ण है।

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