NEET 2026: कर्नाटक की छात्रा का बड़ा आरोप, OMR शीट बदलने से 668 की जगह मिले नेगेटिव 11 नंबर?

Knews Desk– नीट यूजी 2026 री-एग्जाम को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। रिजल्ट जारी होने के बाद देशभर से कई अभ्यर्थियों ने OMR शीट और स्कोर को लेकर सवाल उठाए हैं। अब कर्नाटक की छात्रा बिंदुश्री जगदीश पवार ने भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उन्हें उनकी असली OMR शीट की बजाय किसी दूसरे उम्मीदवार की OMR शीट जारी कर दी गई। बिंदुश्री का दावा है कि जिस OMR शीट को उनके नाम से जारी किया गया है, उसमें केवल 41 सवाल हल किए गए हैं और उनका स्कोर नेगेटिव 11 बन रहा है, जबकि उन्होंने परीक्षा में 180 में से 165 प्रश्नों के उत्तर दिए थे और उनके अनुसार उनका स्कोर 668 अंक होना चाहिए।

बिंदुश्री का आरोप है कि 16 जुलाई को जारी की गई OMR शीट में कई तरह की गड़बड़ियां दिखाई दे रही हैं। उनका कहना है कि शीट पर दर्ज उत्तर उनके द्वारा परीक्षा में दिए गए उत्तरों से मेल नहीं खाते। उन्होंने सरकार और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) से मांग की है कि उनकी वास्तविक OMR शीट सार्वजनिक की जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। उनका कहना है कि उन्हें केवल न्याय चाहिए और उनकी मेहनत का सही मूल्यांकन होना चाहिए।नीट यूजी 2026 को लेकर यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी कई अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया था कि उनकी OMR शीट गलत अपलोड की गई या उनके अंकों में गड़बड़ी हुई है। कुछ छात्रों का दावा था कि उन्होंने जितने प्रश्न हल किए थे, OMR शीट में उससे काफी कम उत्तर दर्ज दिखाई दे रहे हैं। कई छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि उनके वास्तविक अंकों की तुलना में काफी कम स्कोर जारी किया गया।

हालांकि, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) पहले भी ऐसे कई मामलों पर अपना पक्ष रख चुकी है। एजेंसी का कहना है कि जांच के दौरान अधिकांश मामलों में छात्रों के दावे सही नहीं पाए गए। NTA ने यह भी कहा था कि सोशल मीडिया पर साझा की जा रही कुछ OMR शीट और स्क्रीनशॉट कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) या अन्य डिजिटल माध्यमों से बदले गए थे, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हुई। एजेंसी ने स्पष्ट किया था कि आधिकारिक रिकॉर्ड सुरक्षित हैं और मूल्यांकन तय प्रक्रिया के अनुसार किया गया है।इसके बावजूद कुछ मामले अदालत तक भी पहुंचे हैं, जहां अभ्यर्थियों ने अपनी OMR शीट और परिणाम की स्वतंत्र जांच की मांग की है। ऐसे मामलों ने परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर नई बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि छात्रों की शंकाओं को दूर करने के लिए पारदर्शी और समयबद्ध जांच बेहद जरूरी है, ताकि योग्य उम्मीदवारों के साथ किसी तरह का अन्याय न हो।

इसी बीच केंद्र सरकार भी प्रवेश परीक्षा प्रणाली में सुधार की दिशा में कदम उठा रही है। हाल के घटनाक्रम के बाद एंट्रेंस एग्जाम सिस्टम की समीक्षा और सुधार के लिए छह सदस्यीय टास्क फोर्स का गठन किया गया है। सरकार का कहना है कि भविष्य में ऐसी शिकायतों को कम करने और परीक्षा प्रक्रिया को अधिक भरोसेमंद बनाने के लिए आवश्यक बदलाव किए जाएंगे।फिलहाल बिंदुश्री जगदीश पवार के आरोपों पर NTA की ओर से कोई अलग आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि एजेंसी इस मामले में जांच करती है या कोई स्पष्टीकरण जारी करती है, तो उससे पूरे विवाद की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी। तब तक यह मामला नीट यूजी 2026 से जुड़े उन विवादों में शामिल हो गया है, जिन्होंने परीक्षा प्रणाली की निष्पक्षता को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

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