क्या बिहार से हर साल सबसे ज्यादा बनते हैं IAS-IPS? जानिए क्या कहते हैं उपलब्ध आंकड़े

Knews Desk- देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में शामिल संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा (CSE) हर साल लाखों युवाओं के सपनों की कसौटी बनती है। करीब 8 से 10 लाख अभ्यर्थी आवेदन करते हैं, लेकिन अंतिम चयन केवल लगभग 900 से 1000 उम्मीदवारों का ही होता है। ऐसे में अक्सर यह सवाल उठता है कि आखिर किस राज्य से सबसे ज्यादा IAS-IPS अधिकारी बनते हैं और क्या बिहार वास्तव में इस सूची में सबसे आगे है?

UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 के लिए कुल 9,37,876 उम्मीदवारों ने आवेदन किया था। इनमें से 5,76,793 अभ्यर्थी प्रारंभिक परीक्षा में शामिल हुए। प्रारंभिक परीक्षा के बाद 14,161 उम्मीदवार मुख्य परीक्षा के लिए चुने गए, जबकि 2,736 अभ्यर्थियों ने इंटरव्यू चरण तक पहुंच बनाई। अंततः आयोग ने विभिन्न सेवाओं के लिए 958 उम्मीदवारों का चयन किया, जिनमें 659 पुरुष और 299 महिलाएं शामिल थीं।

भाषा को लेकर UPSC परीक्षा में लंबे समय से बहस होती रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, हिंदी माध्यम से मुख्य परीक्षा देने वाले सफल उम्मीदवारों की संख्या अंग्रेजी माध्यम की तुलना में काफी कम रही।

  • 2021: 538 अभ्यर्थियों ने हिंदी माध्यम से मुख्य परीक्षा दी, 26 सफल हुए।
  • 2022: 587 उम्मीदवारों में से 71 का चयन हुआ।
  • 2023: 599 उम्मीदवारों में 57 सफल रहे।
  • 2024: 1,133 उम्मीदवारों ने हिंदी माध्यम चुना, लेकिन केवल 50 का चयन हुआ।

इन आंकड़ों से यह संकेत मिलता है कि अंग्रेजी माध्यम के उम्मीदवारों की सफलता दर अपेक्षाकृत अधिक रही, हालांकि UPSC ने भाषा के आधार पर कोई आधिकारिक तुलना जारी नहीं की है।

पिछले पांच वर्षों में कुल चयन

सिविल सेवा परीक्षा में चयनित उम्मीदवारों की संख्या इस प्रकार रही—

  • 2025 – 958
  • 2024 – 1009
  • 2023 – 1016
  • 2022 – 933
  • 2021 – 685

UPSC अपने अंतिम परिणाम में उम्मीदवारों का नाम, रोल नंबर, रैंक और श्रेणी जारी करता है, लेकिन उनका गृह राज्य नहीं बताता। इसलिए किस राज्य से कितने उम्मीदवार सफल हुए, इसका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। मीडिया रिपोर्ट, सार्वजनिक जानकारी और उम्मीदवारों के पते के आधार पर अनुमान लगाए जाते हैं।

अनुमानित आंकड़ों के अनुसार, हर साल उत्तर प्रदेश से लगभग 120 से 130, बिहार और राजस्थान से 70 से 80, महाराष्ट्र से 60 से 70, मध्य प्रदेश से 40 से 50, तमिलनाडु से 35 से 50, दिल्ली और हरियाणा से 30 से 40 तथा तेलंगाना और पंजाब से भी अच्छी संख्या में उम्मीदवार सफल होते हैं।

उत्तर प्रदेश क्यों रहता है आगे?

विशेषज्ञों के अनुसार उत्तर प्रदेश लंबे समय से UPSC में अग्रणी राज्यों में शामिल है। इसकी बड़ी आबादी, प्रयागराज, लखनऊ और वाराणसी जैसे प्रमुख शिक्षा केंद्र, प्रतियोगी परीक्षाओं का मजबूत माहौल और प्रशासनिक सेवाओं के प्रति जागरूकता इसकी बड़ी वजह मानी जाती है। अधिक अभ्यर्थियों के परीक्षा देने से चयनित उम्मीदवारों की संख्या भी स्वाभाविक रूप से अधिक रहती है।

पिछले कुछ वर्षों में राजस्थान का प्रदर्शन भी उल्लेखनीय रहा है। जयपुर, कोटा और जोधपुर जैसे शहरों में UPSC की तैयारी के लिए मजबूत कोचिंग नेटवर्क विकसित हुआ है। इसी कारण राज्य से लगातार बड़ी संख्या में अभ्यर्थी सफलता हासिल कर रहे हैं।

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