KNEWS DESK – शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर CJP प्रमुख अभिजीत दिपके ने समर्थकों का जताया आभार। बोले- पिछले 37 दिन बेहद मुश्किल रहे, अब राहत महसूस हो रही है।
NEET 2026 पेपर लीक मामले को लेकर छात्रों के आंदोलन के बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के प्रमुख अभिजीत दिपके ने रविवार सुबह सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया। वीडियो में उन्होंने आंदोलन से जुड़े अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि लंबे समय बाद उन्हें सुकून महसूस हो रहा है और कई दिनों बाद चैन की नींद आई है।
अभिजीत दिपके ने कहा, “आज फाइनली कई दिनों बाद आराम से सो पाया हूं और अपने बेडरूम में उठ पाया हूं। आज यह चिंता नहीं थी कि शाम तक क्या होगा। पिछले 37 दिनों में जो मानसिक दबाव और तनाव झेला, वह बिल्कुल भी आसान नहीं था। यह सिर्फ मेरे लिए नहीं, बल्कि आंदोलन से जुड़े हर व्यक्ति के लिए बेहद कठिन समय था।”
समर्थकों का जताया आभार
दिपके ने आंदोलन के दौरान साथ देने वाले सभी लोगों का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि जब कई लोग उनके अभियान पर सवाल उठा रहे थे, तब भी हजारों लोगों ने उन पर भरोसा किया और मजबूती से उनके साथ खड़े रहे। उन्होंने कहा कि लोगों के समर्थन के बिना यह आंदोलन इस मुकाम तक नहीं पहुंच पाता।
टाइफाइड होने की वजह से नहीं कर पाए मुलाकात
वीडियो में अभिजीत दिपके ने उन लोगों से भी माफी मांगी, जिनसे वह हाल के दिनों में मुलाकात नहीं कर सके। उन्होंने बताया कि आंदोलन के दौरान उन्हें टाइफाइड हो गया था और तेज बुखार की वजह से स्वास्थ्य भी काफी प्रभावित रहा। इसी कारण वह कई समर्थकों और सहयोगियों से व्यक्तिगत रूप से नहीं मिल पाए।
आलोचकों का भी किया धन्यवाद
अभिजीत दिपके ने अपने आलोचकों का भी आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि आलोचना ने उन्हें अपनी कमियों को समझने और सुधार करने का अवसर दिया। उनके मुताबिक, लोगों द्वारा उठाए गए कई सवाल पूरी तरह जायज थे और उन्हीं से सीख लेकर आंदोलन को बेहतर ढंग से आगे बढ़ाया जा सका।
मजाक से शुरू हुआ अभियान, देशव्यापी आंदोलन में बदला
अभिजीत दिपके ने मई 2026 में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की एक टिप्पणी के जवाब में व्यंग्यात्मक अंदाज में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) की शुरुआत की थी। हालांकि, कुछ ही समय में यह पहल छात्रों और युवाओं के बड़े आंदोलन में बदल गई। करीब 70 दिनों तक चले इस अभियान में बड़ी संख्या में युवाओं, खासकर Gen Z पीढ़ी ने हिस्सा लिया और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता तथा जवाबदेही की मांग को लेकर आवाज बुलंद की।