17 साल के छात्र ने खोली CBSE सिस्टम की पोल, संसदीय समिति तक पहुंची आवाज

KNEWS DESK- सीबीएसई की 12वीं बोर्ड परीक्षा में लागू किए गए ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम को लेकर एक 17 वर्षीय छात्र इन दिनों राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। छात्र सार्थक सिद्धांत ने इस मूल्यांकन प्रणाली और इससे जुड़ी टेंडर प्रक्रिया में कथित खामियों को लेकर ऐसा शोध प्रस्तुत किया कि मामला संसद की शिक्षा संबंधी स्थायी समिति तक पहुंच गया।

मंगलवार को संसद भवन में आयोजित शिक्षा संबंधी संसदीय स्थायी समिति की बैठक में सार्थक सिद्धांत ने अपने निष्कर्षों और सवालों को विस्तार से रखा। समिति के अध्यक्ष और वरिष्ठ सांसद दिग्विजय सिंह की मौजूदगी में शिक्षा मंत्रालय और सीबीएसई के अधिकारियों के सामने छात्र ने ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम की कमियों तथा टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं पर प्रस्तुति दी।

सार्थक सिद्धांत हाल ही में 12वीं बोर्ड परीक्षा में शामिल हुए थे। परीक्षा परिणाम आने के बाद उन्होंने मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर अध्ययन शुरू किया और एक विस्तृत ब्लॉग प्रकाशित किया। इस ब्लॉग में उन्होंने OSM सिस्टम के संचालन, छात्रों को हुई परेशानियों और टेंडर प्रक्रिया से जुड़े कई सवाल उठाए।

उनका दावा है कि ऑन-स्क्रीन मार्किंग के लिए चयनित कंपनी को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से टेंडर की कुछ शर्तों में बदलाव किए गए। ब्लॉग में उन्होंने कई ऐसी विसंगतियों का उल्लेख किया, जिनसे प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं।

सार्थक के शोध और ब्लॉग को व्यापक चर्चा मिलने के बाद संसदीय समिति ने उन्हें अपनी बात रखने के लिए आमंत्रित किया। बैठक के दौरान उन्होंने दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर अपनी बात रखी, जिससे समिति के कई सदस्य प्रभावित हुए।

सूत्रों के अनुसार, बैठक में सीबीएसई अधिकारियों से भी OSM सिस्टम और छात्रों द्वारा उठाई गई शिकायतों को लेकर सवाल पूछे गए। अब समिति सीबीएसई के जवाबों और छात्र द्वारा प्रस्तुत तथ्यों का अध्ययन करेगी।

सार्थक का ब्लॉग सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। कई राजनीतिक नेताओं और शिक्षाविदों ने उनकी पहल की सराहना की। लोगों ने इस बात को लेकर आश्चर्य जताया कि एक 17 वर्षीय छात्र ने इतनी गहराई से शोध कर एक राष्ट्रीय स्तर के शैक्षणिक मुद्दे को सामने रखा।

सोशल मीडिया पर कई उपयोगकर्ताओं ने इसे युवाओं की जागरूकता और विश्लेषण क्षमता का उदाहरण बताया। वहीं कुछ लोगों ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए ऐसे प्रयासों को महत्वपूर्ण बताया।

सीबीएसई ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह नियमों और निर्धारित मानकों के अनुसार संपन्न की गई थी। बोर्ड का कहना है कि चयनित कंपनी को सबसे कम बोली लगाने के आधार पर टेंडर दिया गया और सभी प्रक्रियाओं का पालन किया गया।

साथ ही बोर्ड ने यह भी कहा कि मूल्यांकन से जुड़ी जिन समस्याओं की शिकायतें सामने आई हैं, उन्हें दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

शिक्षा संबंधी संसदीय समिति के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह ने कहा कि छात्र द्वारा उठाए गए मुद्दों और सीबीएसई के जवाबों की समीक्षा की जाएगी। उन्होंने इसे छात्रों के हितों से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बताते हुए कहा कि समिति तथ्यों के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी और आवश्यक सिफारिशें देगी।

सार्थक सिद्धांत की पहल ने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और तकनीकी प्रणालियों की समीक्षा को लेकर नई बहस शुरू कर दी है। एक छात्र की आवाज अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन चुकी है।

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