Knews Desk– मीडिया कारोबारी सुभाष चंद्रा के करीब 22,006 करोड़ रुपये के कर्ज से जुड़े मामले में NCLT ने बड़ा फैसला सुनाया है। ट्रिब्यूनल ने उनके पर्सनल इनसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्लान को मंजूरी दे दी है। इसके तहत चंद्रा करीब 22 हजार करोड़ रुपये की देनदारी के मुकाबले महज 6.5 करोड़ रुपये का भुगतान करेंगे। यानी कर्जदाताओं को उनके दावे का लगभग 0.03 प्रतिशत ही वापस मिल पाएगा।
मामले में कुल 22,006.57 करोड़ रुपये की देनदारी सामने आई थी। इसके मुकाबले 6.5 करोड़ रुपये का सेटलमेंट प्रस्ताव रखा गया, जिसे कर्जदाताओं के 80.81 प्रतिशत वोटिंग शेयर का समर्थन मिला। NCLT ने इसी बहुमत और उपलब्ध संपत्तियों को ध्यान में रखते हुए योजना को मंजूरी दी।
सबसे बड़ा असर LIC Housing Finance पर पड़ा है। कंपनी ने सुभाष चंद्रा के खिलाफ 1,322.39 करोड़ रुपये का दावा किया था, लेकिन मंजूर योजना के तहत उसे सिर्फ 38.09 लाख रुपये मिलने हैं। यह उसके कुल दावे का बेहद छोटा हिस्सा है। LIC Housing Finance ने इस योजना का विरोध करते हुए इसे अव्यावहारिक और कानूनी तौर पर गलत बताया था।
NCLT के सामने यह भी तर्क रखा गया कि सुभाष चंद्रा की निजी संपत्तियों का मूल्य 6.5 करोड़ रुपये से कम है। ट्रिब्यूनल ने कहा कि कर्जदाताओं का व्यावसायिक फैसला उनकी अपनी प्रक्रिया का हिस्सा है और अदालत इस ‘कमर्शियल विजडम’ में दखल नहीं दे सकती। चूंकि प्रस्ताव को जरूरी बहुमत का समर्थन मिला था, इसलिए इसे मंजूरी दी गई।
मामले की सुनवाई कर रही दो सदस्यीय बेंच में पहले सहमति नहीं बन पाई थी। इसके बाद तीसरे न्यायिक सदस्य नीलेश शर्मा की नियुक्ति हुई। उनके निर्णय के बाद सेटलमेंट प्लान को अंतिम मंजूरी मिली।
NCLT ने यह भी स्पष्ट किया कि मंजूर हो चुका रिजॉल्यूशन प्लान सभी संबंधित कर्जदाताओं पर लागू होगा। इसका मतलब है कि जिन संस्थानों ने इस प्रस्ताव का विरोध किया था, वे भी अब अलग से अपनी पुरानी देनदारी की वसूली नहीं कर सकेंगे।
अब रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल को कर्जदाताओं की अंतिम सूची तैयार करनी है। इसके बाद मूल बेंच आवश्यक औपचारिक आदेश जारी करेगी। इस बीच बाजार में Zee Entertainment Enterprises के शेयरों में भी हल्की तेजी देखने को मिली और गुरुवार को शेयर करीब 104.85 रुपये पर कारोबार कर रहा था।