KNEWS DESK – जयपुर की एयरपोर्ट कॉलोनी में हुई 50 वर्षीय नीरज शर्मा की मौत ने पूरे शहर को झकझोर दिया है। शुरुआत में इसे एक सामान्य सड़क हादसा माना गया, लेकिन पुलिस की गहन जांच में सामने आई कहानी ने हर किसी को हैरान कर दिया। जांच में खुलासा हुआ कि यह हादसा नहीं बल्कि एक सुनियोजित हत्या थी, जिसकी साजिश कथित तौर पर नीरज की 24 वर्षीय बेटी आयुषी शर्मा ने रची थी।
पुलिस के अनुसार, आयुषी ने सरकारी नौकरी, करोड़ों रुपये की संपत्ति और घरों पर कब्जे के लालच में अपनी मां की हत्या की योजना बनाई। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि पूछताछ के दौरान भी आयुषी के व्यवहार में किसी तरह का पछतावा नजर नहीं आया।
पिता की मौत के बाद शुरू हुआ विवाद
पुलिस जांच के मुताबिक, करीब एक साल पहले नीरज के पति विजय वशिष्ठ उर्फ विजय शर्मा का निधन हो गया था। विजय लोअर कोर्ट में एलडीसी के पद पर कार्यरत थे। परिवार में उनकी पत्नी नीरज, बेटी आयुषी और 16 वर्षीय दिव्यांग बेटा था।
पति की मौत के बाद अनुकंपा नियुक्ति का मौका आया। आयुषी सरकारी नौकरी चाहती थी, लेकिन परिवार की जिम्मेदारियों को देखते हुए नीरज के भाई ने सलाह दी कि नौकरी नीरज को करनी चाहिए, ताकि दिव्यांग बेटे की देखभाल हो सके। इसके बाद नीरज ने पति की जगह नौकरी जॉइन कर ली।
पुलिस का दावा है कि इसी फैसले के बाद आयुषी के मन में अपनी मां के प्रति नाराजगी बढ़ती गई और उसने कथित तौर पर हत्या की साजिश रचनी शुरू कर दी।
करोड़ों की जमीन का लालच देकर जुटाए साथी
जांच में सामने आया कि आयुषी ने अपने चचेरे भाई बलराम के साथ मिलकर मां की हत्या की योजना बनाई। आरोप है कि उसने मदद के बदले आगरा रोड स्थित करीब 5 करोड़ रुपये की जमीन और भरतपुर की करीब 5 करोड़ रुपये की जमीन देने का वादा किया था।
पुलिस के मुताबिक, मां की मौत के बाद आयुषी की नजर सरकारी नौकरी और जयपुर स्थित दोनों मकानों पर भी थी।
पहले भी हुई थी हत्या की कोशिश
पुलिस के अनुसार, साजिश में कई लोग शामिल थे। एक महीने पहले नीरज को थार गाड़ी से कुचलने की कोशिश की गई थी, लेकिन वह बच गई थीं। इसके बाद कथित तौर पर आयुषी ने उन्हें घर से बाहर करने के लिए डराने-धमकाने और टोने-टोटके जैसी हरकतों का सहारा लिया।
खतरे का अंदेशा होने पर नीरज ने घर में सुरक्षा के लिए जाली लगवाई और चार सीसीटीवी कैमरे भी लगवाए थे। यही कैमरे बाद में हत्या की गुत्थी सुलझाने में अहम साबित हुए।
7 लाख रुपये की सुपारी और स्कॉर्पियो से वारदात
पुलिस के मुताबिक, हत्या को अंजाम देने के लिए 7 लाख रुपये की सुपारी तय की गई थी। इसके लिए हरियाणा नंबर की एक स्कॉर्पियो किराए पर ली गई। आरोप है कि कुछ लोगों को नीरज की रेकी करने और कुछ को गाड़ी से टक्कर मारने की जिम्मेदारी दी गई।
4 जुलाई को नीरज अपने दिव्यांग बेटे को फिजियोथेरेपी कराकर घर लौट रही थीं। इसी दौरान आयुषी ने उन्हें किसी जरूरी काम का बहाना बनाकर बुलाया। रास्ते में पहले से मौजूद लोगों ने इशारा किया और तेज रफ्तार स्कॉर्पियो ने सड़क किनारे चल रहीं नीरज को टक्कर मार दी। हादसा इतना भीषण था कि उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
CCTV फुटेज ने खोला हत्या का राज
नीरज की मौत के बाद आयुषी ने अपने मामा को फोन कर हादसे की जानकारी दी, लेकिन उनके व्यवहार पर मामा को शक हुआ और उन्होंने पुलिस से मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज में सामने आया कि नीरज सड़क के किनारे चल रही थीं और सड़क लगभग खाली थी। वहीं दूसरी फुटेज में कथित तौर पर पहले से खड़ी स्कॉर्पियो और रेकी कर रहे लोगों की गतिविधियां दिखाई दीं।
पुलिस ने स्कॉर्पियो बरामद कर जांच आगे बढ़ाई। वाहन मालिक से पूछताछ के बाद जांच की कड़ी हेमंत, मोहन शर्मा और फिर आयुषी तक पहुंची।
पूछताछ में सामने आई पूरी साजिश
पुलिस ने भरतपुर के रूपवास गांव से आयुषी को हिरासत में लिया और जयपुर लेकर आई। आरोपियों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की गई, जिसमें पुलिस के मुताबिक आयुषी ने पूरी साजिश कबूल कर ली।
पुलिस का कहना है कि पूछताछ के दौरान भी आयुषी के चेहरे पर पछतावे के भाव नजर नहीं आए। फिलहाल पुलिस मामले में शामिल अन्य आरोपियों की भूमिका और पूरी साजिश की कड़ियों की जांच कर रही है।