कोलकाता के मिर्जा गालिब स्ट्रीट और आसपास के इलाकों में होटलों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। TV9 भारतवर्ष की पड़ताल में कई ऐसे होटल सामने आए, जहां कथित तौर पर न तो वैध म्युनिसिपल लाइसेंस मिला और न ही फायर सेफ्टी की जरूरी मंजूरी। तंग कमरों, संकरी सीढ़ियों और अवैध निर्माण के बीच लोगों की सुरक्षा पर भी सवाल उठ रहे हैं।
Knews Desk- कोलकाता के मिर्जा गालिब स्ट्रीट इलाके में होटल में लगी भीषण आग के बाद वहां चल रहे छोटे-बड़े लॉजिंग कारोबार की हकीकत सामने आने लगी है। आग की इस घटना में बांग्लादेश के 8 लोगों की मौत हुई। इसके बाद TV9 भारतवर्ष की टीम ने मिर्जा गालिब स्ट्रीट और आसपास की फ्री स्कूल स्ट्रीट में कई होटलों का जायजा लिया।
जांच के दौरान ऐसे कई होटल और लॉज मिले, जहां सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर कमियां दिखाई दीं। कई जगहों पर होटल पुराने रिहायशी मकानों में बनाए गए हैं। समय के साथ इन इमारतों में अतिरिक्त मंजिलें, बालकनी और छत पर कमरे जोड़ दिए गए। कुछ हिस्सों में एस्बेस्टोस शीट और कमजोर पार्टिशन का इस्तेमाल भी दिखाई दिया।
तंग गलियों और कमरों में सुरक्षा इंतजामों की कमी
इलाके के कई होटल बेहद संकरी जगहों पर संचालित होते मिले। कुछ कमरों में इतनी कम जगह थी कि आराम से खड़ा होना भी मुश्किल था। कई इमारतों की सीढ़ियां जर्जर नजर आईं, जबकि कॉरिडोर में बिजली के तारों का जाल दिखाई दिया।
सबसे बड़ी चिंता आपात स्थिति में बाहर निकलने के रास्तों को लेकर सामने आई। कई जगहों पर इमरजेंसी एग्जिट की व्यवस्था नहीं दिखी। जहां रास्ते मौजूद थे, वे भी बेहद संकरे थे और आग जैसी आपदा के दौरान लोगों को बाहर निकालना मुश्किल हो सकता है।
लाइसेंस और फायर NOC पर भी सवाल
TV9 की टीम ने कई होटल संचालकों से कोलकाता म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन का लाइसेंस और फायर NOC दिखाने को कहा। हालांकि, कई संचालक जरूरी दस्तावेज पेश नहीं कर सके। कुछ ने माना कि उनका कारोबार पूरी तरह औपचारिक प्रक्रिया के तहत संचालित नहीं हो रहा था, जबकि कुछ ने इसके लिए सरकारी व्यवस्था की कमियों को जिम्मेदार बताया।
पड़ताल के दौरान एक होटल में बेहद छोटी जगह पर स्पा भी चलता मिला। वहां सेवाओं का कमर्शियल साइनबोर्ड लगा था, लेकिन वैध कमर्शियल लाइसेंस से जुड़े दस्तावेज स्पष्ट रूप से सामने नहीं आए।
‘कमरे में होते तो शायद बच नहीं पाते’
हादसे के बाद इलाके के होटल कर्मचारियों में भी डर का माहौल है। एक कर्मचारी ने बताया कि अगर वह और उसके साथी घटना वाली रात अपने कमरों में मौजूद होते, तो उनके लिए भी स्थिति बेहद खतरनाक हो सकती थी।
एक महिला प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि कमरे बेहद छोटे और दमघोंटू हैं। उनके मुताबिक, लोगों को सुरक्षित बाहर निकलने में करीब 15 मिनट लगे। उन्होंने कहा कि वे भगवान की कृपा से बच सके।
होटल मालिक और मैनेजर हिरासत में
आग की घटना के मामले में पुलिस ने संबंधित प्रॉपर्टी के मालिक और मैनेजर को हिरासत में लिया है। उनसे पूछताछ की जा रही है। हादसे के बाद अब इस बात की जांच भी अहम हो गई है कि होटल को संचालित करने की अनुमति किस आधार पर मिली और सुरक्षा मानकों की जांच क्यों नहीं हुई।
हादसे के बाद सियासत भी तेज
मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है। बीजेपी विधायक सजल घोष ने आरोप लगाया कि इस तरह के होटल लंबे समय से अलग-अलग सरकारों के कार्यकाल में बढ़ते रहे हैं। उन्होंने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
वहीं, तृणमूल कांग्रेस के विधायक कुणाल घोष ने भी कहा कि पूर्व अधिकारियों और उस समय जिम्मेदारी संभाल रहे वरिष्ठ अधिकारियों से यह सवाल पूछा जाना चाहिए कि लाइसेंस कैसे जारी हुए और सुरक्षा मानकों की जांच क्यों नहीं हुई।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि मिर्जा गालिब स्ट्रीट जैसे घनी आबादी वाले इलाके में बिना पर्याप्त सुरक्षा इंतजामों के होटल और लॉजिंग यूनिट आखिर कैसे संचालित होती रहीं। आग की घटना ने प्रशासनिक निगरानी और होटल सुरक्षा व्यवस्था, दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।