शिव शंकर सविता- दिल को झकझोर देने वाली यह वारदात फतेहपुर जिले के जाफरगंज थाना क्षेत्र के अंगदपुर गांव की है। जिस ज़मीन को तक्कीलाल ने अपनी औलाद की तरह सींचा, जिस ज़मीन पर उनके परिवार का भविष्य टिका था, वही कीमती ज़मीन आखिरकार उनके खून से लाल हो गई। बुधवार की वो काली रात एक बेऔलाद बुजुर्ग और उसकी लाचार पत्नी के लिए ऐसा मातम लेकर आएगी, इसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। अदालत में अंतिम बहस की तारीख से ठीक एक रात पहले, 65 वर्षीय पशुपालक तक्कीलाल सोनकर की सोते समय धारदार हथियारों से बेरहमी से हत्या कर दी गई। कातिलों की बेरहमी का आलम यह था कि तक्कीलाल के सिर और चेहरे पर 10 से अधिक गहरे घाव थे और उनकी दोनों आंखें भी फोड़ दी गईं। तक्कीलाल और उनकी पत्नी गुलाबी देवी की अपनी कोई संतान नहीं थी। सूने घर की रौनक बढ़ाने के लिए वे पिछले सात साल से अपनी एक भतीजी को अपने पास रख रहे थे। गुलाबी देवी चाहती थीं कि बुढ़ापे का सहारा बनने वाली इस भतीजी के नाम वे अपनी संपत्ति कर दें, जबकि तक्कीलाल अपने भतीजों को यह ज़मीन देना चाहते थे। सड़क किनारे स्थित यह 18 बिसबा बंजर ज़मीन समय के साथ बेहद कीमती हो चुकी थी। जोनिहा-अमौली मार्ग से जुड़े लिंक रोड के कारण इस ज़मीन पर कइयों की गंदी नज़र थी। अपनों की इसी ज़मीन की लालच ने चचेरे भाइयों को ही खून का प्यासा बना दिया। साल 2017 से यह मामला अदालत में चल रहा था, और हर गुज़रते दिन के साथ तक्कीलाल की जान पर खतरा बढ़ता जा रहा था।
पहले भतीजे को किया अपाहिज, फिर चाचा की ले ली सांसें
यह पहली बार नहीं था जब इस ज़मीन के लिए खून बहाया गया या साज़िश रची गई। तक्कीलाल के भतीजे समरलाल ने रुंधे गले से बताया कि इस मुक़दमे के पहले वादी वही थे। साल 2021 में जब वह बैंक से लौट रहे थे, तो उन पर जानलेवा हमला करने की नीयत से एक संदेहास्पद दुर्घटना कराई गई थी, जिसमें समरलाल हमेशा के लिए दिव्यांग हो गए। भतीजे के लाचार होने के बाद बूढ़े चाचा तक्कीलाल ने हिम्मत नहीं हारी और मुक़दमे की पैरवी खुद संभाल ली। करीब छह महीने पहले उनकी कोठरी भी गिरा दी गई थी, लेकिन तक्कीलाल अपनी ज़मीन की रक्षा के लिए डटे रहे। इसी बात की खुन्नस में बृहस्पतिवार को अदालत की अंतिम बहस से ठीक पहले इस खौफनाक वारदात को अंजाम दे दिया गया।
“तारीख पर गए तो जान से मार देंगे…” चीखती रही बेबस पत्नी
घटना की रात तक्कीलाल हमेशा की तरह घर से 100 मीटर दूर अपने पशुबाड़े में सोने गए थे। पास ही में बरातशाला में उनके बड़े भाई प्रहलाद भी सो रहे थे, लेकिन किसी को भनक तक नहीं लगी। सुबह जब प्रहलाद वहां पहुंचे तो तक्कीलाल का क्षत-विक्षत शव देखकर उनके पैरों तले ज़मीन खिसक गई। रोती-बिलखती पत्नी गुलाबी देवी ने बताया कि घटना की शाम ही दूसरे पक्ष ने धमकी दी थी कि ‘अगर सुबह अदालत की तारीख पर गए तो जान से मार देंगे।’ ग्रामीणों के अनुसार, बुधवार की आधी रात को दो अनजान युवक बाइक से गांव की तरफ जाते और फिर दो घंटे बाद जोनिहा की तरफ लौटते देखे गए थे। गांव वालों का कहना है कि अगर नामजद आरोपी ही असली कातिल होते, तो वे सुबह तक गांव में न रुकते। ऐसे में पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या ज़मीन हड़पने के इस खेल में पीछे से कोई और बड़ी ताकत तो काम नहीं कर रही थी?
शव उठाने से रोका, छह नामजद आरोपियों पर केस दर्ज
बुजुर्ग तक्कीलाल की दर्दनाक मौत से गुस्साए और सहमे परिजनों ने आरोपियों की तुरंत गिरफ्तारी की मांग को लेकर पुलिस को करीब 20 मिनट तक शव उठाने नहीं दिया। पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने मौके पर पहुंचकर सारे साक्ष्य जुटाए हैं। एसपी अभिमन्यु मांगलिक ने बताया कि मृतक की पत्नी की तहरीर पर चचेरे भाई रामखेलावन, बरमबली, शिवमोहन समेत छह लोगों के खिलाफ हत्या की प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। पुलिस की टीमें आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दे रही हैं। एक बेऔलाद बुजुर्ग की इस तरह की दर्दनाक हत्या ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है।