मां की आखिरी गुहार भी नहीं रोक सकी बेटे को, छलांग लगाते ही पीछे गिरे माता-पिता; एक झटके में खत्म हुआ परिवार

Knews Desk- महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर से सामने आई एक दर्दनाक घटना ने हर किसी को झकझोर दिया। मोबाइल और पिता से विवाद के बाद 16 वर्षीय कुणाल ने खवड्या पहाड़ से छलांग लगा दी। उसे बचाने की कोशिश में उसके माता-पिता भी गहरी खाई में जा गिरे। हादसे में तीनों की मौत हो गई।

कुणाल मूल रूप से जालना के अंबड तालुका स्थित धनगर पिंपलवाड़ी गांव का रहने वाला था। उसका परिवार करीब 18 वर्षों से संभाजीनगर में रह रहा था। कुणाल ने हाल ही में 10वीं की परीक्षा में 92 प्रतिशत अंक हासिल किए थे और 11वीं में दाखिला लिया था। वह आगे चलकर डॉक्टर बनना चाहता था।

बताया जा रहा है कि पिछले कुछ दिनों से कुणाल का अपने पिता के साथ पैसों और मोबाइल की EMI को लेकर विवाद चल रहा था। खर्च के लिए पैसे न मिलने और महंगे iPhone की किस्तों को लेकर वह तनाव में था। शुक्रवार को विवाद बढ़ने के बाद कुणाल ने अपना iPhone, घड़ी और चांदी की चेन उतारकर फेंक दी और घर से निकलकर खवड्या पहाड़ की ओर चला गया।

बेटे को इस हालत में देखकर उसके माता-पिता भी उसके पीछे-पीछे पहाड़ तक पहुंच गए। कुणाल खाई के किनारे खड़ा होकर छलांग लगाने की बात कहने लगा। मां ने उसे रोकने की हर संभव कोशिश की और बार-बार वापस आने की गुहार लगाती रही।

मां ने कहा- मंगलसूत्र तक फेंक दूंगी

कुणाल की मां ने बेटे को मनाने के लिए भावुक अपील की। उसने कहा कि अगर पिता से विवाद है तो वह अपने पति को छोड़कर उसके साथ रहने को तैयार है। मां ने यहां तक कहा कि वह अपना मंगलसूत्र उतारकर फेंक देगी, लेकिन बेटा उसे छोड़कर न जाए।

इसके बावजूद कुणाल नहीं माना। उसने कहा कि उसकी कोई बात नहीं सुनता और किसी को उसकी जिंदगी की परवाह नहीं है। इसके बाद उसने करीब 150 से 200 फीट गहरी खाई में छलांग लगा दी।

बेटे को बचाने की कोशिश में माता-पिता भी गिरे

कुणाल के छलांग लगाते ही उसके माता-पिता ने उसे बचाने के लिए आगे बढ़कर पकड़ने की कोशिश की। इसी दौरान उनका संतुलन बिगड़ गया और दोनों भी गहरी खाई में जा गिरे।

सूचना मिलने के बाद पुलिस और रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। काफी मशक्कत के बाद तीनों के शव खाई से बाहर निकाले गए। एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत से इलाके में मातम पसरा हुआ है।

यह घटना न सिर्फ एक परिवार की दर्दनाक कहानी है, बल्कि बच्चों और अभिभावकों के बीच संवाद, मानसिक दबाव और बढ़ती भावनात्मक दूरी को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।