बरेली CMO दफ्तर में क्राइम ब्रांच की दबिश, फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र मामले में ऑपरेटर गिरफ्तार

दिल्ली क्राइम ब्रांच ने बरेली के CMO कार्यालय में तैनात आउटसोर्सिंग कंप्यूटर ऑपरेटर कुलदीप को हिरासत में लिया है। उस पर फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र तैयार करने की प्रक्रिया में शामिल होने का आरोप है।

KNews Desk- उत्तर प्रदेश के बरेली में फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र तैयार किए जाने के मामले ने स्वास्थ्य विभाग में हलचल बढ़ा दी है। शनिवार को दिल्ली क्राइम ब्रांच की टीम अचानक मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालय पहुंची और वहां काम कर रहे आउटसोर्सिंग कंप्यूटर ऑपरेटर कुलदीप को अपने साथ ले गई। बताया जा रहा है कि वह दिव्यांग प्रमाण पत्र से संबंधित ऑनलाइन कार्य देखता था।

क्राइम ब्रांच को फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र तैयार किए जाने की शिकायत मिली थी। शिकायत के आधार पर जांच आगे बढ़ाई गई और इसी सिलसिले में टीम बरेली पहुंची। CMO कार्यालय में पहुंचने के बाद अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ की गई, जिसके बाद कंप्यूटर ऑपरेटर कुलदीप को हिरासत में लिया गया।

दिव्यांग प्रमाण पत्र की ऑनलाइन प्रक्रिया में थी भूमिका

कुलदीप CMO कार्यालय में आउटसोर्सिंग के जरिए कंप्यूटर ऑपरेटर के तौर पर कार्यरत था। उसकी जिम्मेदारी दिव्यांग प्रमाण पत्र से जुड़े ऑनलाइन कामों में भी बताई जा रही है। जांच में आरोप सामने आया है कि ENT विभाग से जुड़े कुछ कर्मचारियों के साथ मिलकर एक व्यक्ति का कथित तौर पर फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र तैयार किया गया।

अब क्राइम ब्रांच यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी प्रमाण पत्र बनाने की पूरी प्रक्रिया कैसे संचालित हुई और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे। जांच एजेंसी आर्थिक लेन-देन की संभावना समेत अन्य पहलुओं को भी खंगाल सकती है।

CMO को कार्रवाई की पहले से नहीं थी जानकारी

मामले पर CMO डॉ. विश्राम सिंह ने बताया कि कंप्यूटर में गड़बड़ी से संबंधित जानकारी सामने आई थी। इसी मामले में क्राइम ब्रांच कंप्यूटर ऑपरेटर को अपने साथ ले गई। CMO के अनुसार, उन्हें क्राइम ब्रांच की कार्रवाई की पहले से जानकारी नहीं थी और बाद में उन्हें इस घटनाक्रम का पता चला।

कुलदीप को अपने साथ ले जाने के बाद क्राइम ब्रांच उससे पूछताछ कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र बनाने में उसकी क्या भूमिका थी और इस मामले में स्वास्थ्य विभाग के कितने अन्य कर्मचारी शामिल हैं।

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