खराब सड़कें बन रहीं मौत का कारण, हर दिन 80 लोगों की जा रही जान; सरकार की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

Knews Desk- भारत में सड़क हादसों की सबसे बड़ी वजह अक्सर तेज रफ्तार और ट्रैफिक नियमों की अनदेखी को माना जाता है, लेकिन सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) की ताजा रिपोर्ट एक और गंभीर समस्या की ओर इशारा करती है। रिपोर्ट के मुताबिक, खराब सड़कें, अधूरा निर्माण, गलत इंजीनियरिंग और समय पर मरम्मत न होने जैसी कमियों के कारण देश में हर दिन औसतन 80 लोगों की मौत हो रही है।

रोड एक्सीडेंट्स इन इंडिया-2024‘ रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 में सड़कों की खराब स्थिति, गड्ढों, अधूरी परियोजनाओं और इंजीनियरिंग संबंधी खामियों की वजह से 10 हजार से अधिक सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। इन हादसों में करीब 29 हजार लोगों की मौत हुई, जबकि हजारों लोग गंभीर रूप से घायल हुए। रिपोर्ट बताती है कि यदि सड़क निर्माण के मानकों का सख्ती से पालन किया जाए और समय-समय पर मरम्मत हो, तो बड़ी संख्या में दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है।

लगातार बढ़ रहे सड़क हादसे

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश में सड़क दुर्घटनाओं और मौतों का सिलसिला लगातार बढ़ रहा है।

वर्षसड़क हादसेमौतें
20214.12 लाख1.53 लाख
20224.61 लाख1.68 लाख
20234.80 लाख1.72 लाख
20244.87 लाख1.77 लाख
20255.13 लाख1.83 लाख

वहीं, 2026 में 27 जुलाई तक देश में 2.96 लाख सड़क हादसे, 1.01 लाख मौतें और 3.38 लाख लोग घायल हो चुके हैं।

2024 के आंकड़ों के मुताबिक, तमिलनाडु में सबसे अधिक 39,666 सड़क हादसे दर्ज किए गए। इसके बाद मध्य प्रदेश (34,947), उत्तर प्रदेश (26,718), कर्नाटक (24,929), महाराष्ट्र (19,229) और राजस्थान (14,522) का स्थान रहा।

हालांकि, सड़क दुर्घटनाओं में सबसे ज्यादा मौतें उत्तर प्रदेश में दर्ज की गईं, जहां 14,794 लोगों ने जान गंवाई। इसके बाद तमिलनाडु, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश का नंबर रहा।

ओवरस्पीडिंग बनी सबसे बड़ी वजह

रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2026 में अब तक 46,075 सड़क हादसे तेज रफ्तार के कारण हुए। इसके अलावा—

  • गलत दिशा में वाहन चलाने से 2,397 हादसे
  • नशे में ड्राइविंग से 1,443 हादसे
  • रेड लाइट जंप करने से 193 हादसे
  • मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हुए वाहन चलाने से 84 हादसे दर्ज किए गए।

इसके साथ ही ड्राइवर का ध्यान भटकना भी बड़ी वजह बनकर सामने आया, जिसके कारण 1.51 लाख से अधिक दुर्घटनाएं हुईं।

सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 में अब तक खराब सड़क की स्थिति के कारण 29,628 सड़क हादसे दर्ज किए गए। वहीं, गड्ढों की वजह से 100 दुर्घटनाएं हुईं। रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि सड़कों की खराब हालत और मानवीय लापरवाही मिलकर हादसों का जोखिम कई गुना बढ़ा रही हैं।

रिपोर्ट में पैदल यात्रियों की बढ़ती मौतों पर भी चिंता जताई गई है। 2021 में 29,124 पैदल यात्रियों की मौत हुई थी, जो 2025 में बढ़कर 48,039 तक पहुंच गई। वहीं, 2026 में 27 जुलाई तक 24,446 पैदल यात्रियों की मौत दर्ज की जा चुकी है। सबसे ज्यादा मामले तमिलनाडु, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, बिहार और पश्चिम बंगाल से सामने आए हैं।

सड़क सुरक्षा के लिए सरकार की पहल

सरकार ने 2023 से 2025 के ई-डीएआर डेटा के आधार पर राष्ट्रीय राजमार्गों पर 6,358 ब्लैक कॉरिडोर की पहचान की है। आईआईटी कानपुर द्वारा विकसित एआई आधारित तकनीक की मदद से इन स्थानों को चिन्हित किया गया है। यहां रोड मार्किंग, साइन बोर्ड, क्रैश बैरियर, हाईवे लाइटिंग, डिवाइडर और सड़क चौड़ीकरण जैसे सुधार किए जा रहे हैं। इसके अलावा सड़क सुरक्षा बढ़ाने के लिए सरकार 4E रणनीति—Education, Engineering, Enforcement और Emergency Care पर भी काम कर रही है।

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