Knews Desk- उत्तर प्रदेश में सरकारी और सार्वजनिक जमीनों पर अवैध कब्जे के खिलाफ चल रहे एंटी भू-माफिया अभियान को लेकर सरकार ने नए आंकड़े जारी किए हैं। सरकारी जानकारी के मुताबिक पिछले करीब 9 वर्षों में प्रदेश में 84,005 हेक्टेयर यानी लगभग 2.08 लाख एकड़ जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त कराया गया है। इस दौरान 1,413 लोगों को भू-माफिया के तौर पर चिन्हित किया गया, जिनमें से 144 लोग फिलहाल जेल में हैं।
सरकार के मुताबिक एंटी भू-माफिया पोर्टल पर अब तक 4,34,016 शिकायतें दर्ज हुई हैं। इनमें से 4,31,697 शिकायतों का निस्तारण किया जा चुका है, जबकि 2,319 शिकायतें अभी लंबित हैं।
अभियान के तहत अवैध कब्जों के खिलाफ अलग-अलग स्तर पर कानूनी कार्रवाई भी की गई। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 25,068 राजस्व मुकदमे, 1,168 सिविल केस और 4,751 एफआईआर दर्ज की गई हैं।
इसके अलावा 70 लोगों पर गैंगस्टर्स एक्ट, 206 पर गुंडा एक्ट और 3 लोगों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई की गई। 1,621 मामलों में भारतीय दंड संहिता के तहत कार्रवाई हुई, जबकि 1,745 लोगों पर अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की गई।
चार स्तर पर टास्क फोर्स
सरकार ने अवैध कब्जों की पहचान और कार्रवाई के लिए राज्य, मंडल, जिला और तहसील स्तर पर चार स्तरीय एंटी लैंड माफिया टास्क फोर्स बनाई है। शिकायत मिलने के बाद जमीन की जांच, कब्जे की पहचान और कानूनी कार्रवाई से लेकर जमीन को कब्जामुक्त कराने तक की प्रक्रिया इसी व्यवस्था के जरिए संचालित की जाती है।
सरकारी या स्थानीय प्रशासन की अलग-अलग सूचियों में प्रदेश के कई जिलों के लोगों के नाम भू-माफिया के तौर पर दर्ज किए गए हैं। इनमें रामपुर से मशकूर अहमद उर्फ मुन्ना और उज्ज्वल दीदार सिंह उर्फ साबी के नाम शामिल हैं।
कानपुर की सूची में आसिफ उर्फ पप्पू स्मार्ट, सऊद अख्तर, सुधीर शुक्ला और गजेंद्र सिंह नेगी के नाम सामने आते हैं।
लखनऊ में एलडीए की सूची में राजू गुप्ता, तारा सिंह बिष्ट, हाजरा खातून, राजकुमार गुप्ता, शेखू अब्बास और शेरू अब्बास के नाम बताए गए हैं।
अलीगढ़ की घोषित सूची में राधेलाल शर्मा, बुद्ध रंजन सिंह और चौधरी हीरालाल के नाम शामिल हैं। नोएडा क्षेत्र के बिसरख-जलालपुर में कुलदीप सिंह और श्यामा चरण मिश्रा के नाम का उल्लेख किया गया है।
कुशीनगर की सूची में राजेश्वर उर्फ रामेश्वर और उपेंद्र के नाम दर्ज हैं। वहीं प्रयागराज में मो. मुस्लिम, मो. इमरान, मो. जीशान, खालिद जफर, जय प्रकाश दुबे और फहीम अहमद के नाम एंटी भू-माफिया पोर्टल पर दर्ज बताए गए हैं।
2022 में इससे ज्यादा थी चिन्हित भू-माफियाओं की संख्या
गौर करने वाली बात यह है कि उत्तर प्रदेश सरकार के 2022 के आंकड़ों में एंटी भू-माफिया अभियान के तहत 2,471 अतिक्रमणकारियों को भू-माफिया के तौर पर चिन्हित किए जाने की जानकारी दी गई थी। उस समय 186 भू-माफियाओं के जेल में होने की बात सामने आई थी।
हालांकि अलग-अलग समय पर जारी सरकारी आंकड़ों में संख्या बदल सकती है और स्थानीय प्रशासन या पुलिस की सूचियां राज्य स्तर की सूची से अलग हो सकती हैं।
किसी को भू-माफिया घोषित करने का आधार क्या है?
किसी व्यक्ति को भू-माफिया या लैंड ग्रैबर घोषित करने को लेकर कानूनी प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण है। फरवरी 2025 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से इस संबंध में सवाल किया था कि किसी व्यक्ति को भू-माफिया घोषित करने का कानूनी आधार क्या है।
अदालत ने प्रथम दृष्टया माना था कि किसी व्यक्ति को इस तरह घोषित करने से उसकी प्रतिष्ठा और अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए केवल आरोप लगने के आधार पर किसी व्यक्ति को भू-माफिया कहना उचित नहीं है। किसी व्यक्ति का नाम आधिकारिक सरकारी रिकॉर्ड, प्रशासनिक सूची या संबंधित न्यायिक आदेश के संदर्भ में ही बताया जाना चाहिए।
कब्जामुक्त जमीन का क्या होगा?
सरकार के मुताबिक अवैध कब्जे से मुक्त कराई गई जमीन का इस्तेमाल विकास से जुड़ी परियोजनाओं के लिए किया जा सकता है। इनमें उद्योग, मैन्युफैक्चरिंग यूनिट, लॉजिस्टिक्स पार्क, विश्वविद्यालय और मेडिकल कॉलेज जैसी परियोजनाएं शामिल हैं।
सरकार की कोशिश है कि कब्जामुक्त जमीन का इस्तेमाल सार्वजनिक हित और विकास कार्यों के लिए किया जाए, जिससे प्रदेश में निवेश, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सके।