Knews Desk: शेयर बाजार में अगस्त का महीना शुगर स्टॉक्स के लिए बेहद शानदार रहा। चीनी कंपनियों के शेयरों में जबरदस्त खरीदारी देखने को मिली और कई स्टॉक्स ने कुछ ही समय में निवेशकों को 25 से 40 फीसदी तक का रिटर्न दिया। इस तेजी की बड़ी वजह चीनी की कीमतों में उछाल, घरेलू और वैश्विक स्तर पर सप्लाई को लेकर चिंता और एथेनॉल कारोबार से जुड़ी उम्मीदें रही हैं। हालांकि, इतनी तेज रैली के बाद अब बाजार विशेषज्ञ इन कंपनियों के वैल्युएशन को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं।
अगस्त की तेजी में अवध शुगर एंड एनर्जी सबसे आगे रही। 31 जुलाई को कंपनी का शेयर ₹504.65 पर था, जो बढ़कर ₹804.15 तक पहुंच गया। इस तरह निवेशकों को करीब 59.35 फीसदी का शानदार रिटर्न मिला। द्वारिकेश शुगर इंडस्ट्रीज के शेयर में 38.01 फीसदी और डालमिया भारत शुगर में 35.63 फीसदी की तेजी आई। मवाना शुगर्स ने 32.52 फीसदी, धामपुर शुगर मिल्स ने 26.57 फीसदी और धामपुर बायो ऑर्गेनिक्स ने 26.45 फीसदी का रिटर्न दिया। बजाज हिंदुस्तान शुगर भी 26.06 फीसदी चढ़ा। हालांकि, गोदावरी बायोरिफाइनरीज का प्रदर्शन कमजोर रहा और इसका शेयर 8.51 फीसदी गिर गया।शुगर स्टॉक्स में इस तेजी के पीछे चीनी की कीमतों में आया उछाल अहम वजह है। घरेलू बाजार के साथ-साथ ग्लोबल मार्केट में भी चीनी की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है। ब्राजील और थाईलैंड जैसे बड़े चीनी उत्पादक देशों में खराब मौसम की वजह से उत्पादन और सप्लाई प्रभावित होने की आशंका है। अगर वैश्विक स्तर पर चीनी की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो भारतीय चीनी मिलों की कमाई और मुनाफे में सुधार हो सकता है। इसी उम्मीद ने निवेशकों की दिलचस्पी इस सेक्टर में बढ़ाई है।
एथेनॉल भी चीनी कंपनियों के लिए एक बड़ा ग्रोथ ड्राइवर बनकर उभरा है। भारत में पेट्रोल में एथेनॉल ब्लेंडिंग बढ़ाने की नीति से चीनी मिलों को अपनी कमाई के स्रोतों में विविधता लाने का मौका मिला है। बाजार अब कई चीनी कंपनियों को सिर्फ कृषि आधारित कारोबार के तौर पर नहीं, बल्कि ग्रीन एनर्जी से जुड़ी कंपनियों के रूप में भी देख रहा है। यही वजह है कि इस सेक्टर की कई कंपनियों को बाजार में री-रेटिंग का फायदा मिला है।हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया तेजी के बाद निवेशकों को सावधान रहने की जरूरत है। अविनाश मेंटर रिसर्च के संस्थापक अविनाश गोरक्षकर के अनुसार, शुगर स्टॉक्स में आई रैली सेक्टर की री-रेटिंग को दर्शाती है, लेकिन 20 फीसदी एथेनॉल ब्लेंडिंग से मिलने वाले संभावित फायदे का बड़ा हिस्सा शेयरों की मौजूदा कीमतों में शामिल हो चुका है। वहीं इनवेस्ट पीएमएस के बिजनेस हेड हर्षल दासानी का मानना है कि बाजार अगली दो तिमाहियों की संभावित कमाई को पहले ही काफी हद तक कीमतों में शामिल कर चुका है।
आने वाले समय में एथेनॉल की कीमतों में बढ़ोतरी शुगर स्टॉक्स के लिए नया ट्रिगर बन सकती है। इसके अलावा अगर ब्राजील और थाईलैंड में सप्लाई से जुड़ी दिक्कतें बनी रहती हैं और वैश्विक चीनी कीमतें ऊंची रहती हैं, तो भारतीय कंपनियों को इसका फायदा मिल सकता है। दूसरी ओर, सरकार की तरफ से एक्सपोर्ट पर रोक, कोटा सख्त करने या अन्य नीतिगत कदम इन शेयरों की तेजी पर दबाव डाल सकते हैं।विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाले समय में निवेशकों को सिर्फ चीनी उत्पादन पर निर्भर कंपनियों के बजाय मजबूत बैलेंस शीट, कम कर्ज और बेहतर एथेनॉल क्षमता वाली कंपनियों पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। इक्विटी99 के हेड ऑफ रिसर्च राहुल शर्मा ने बलरामपुर चीनी मिल्स को इस सेक्टर का टॉप पिक बताया है। कंपनी की पेराई क्षमता 77,500 टीसीडी और डिस्टिलरी क्षमता 560 केएलडी है।कुल मिलाकर, शुगर स्टॉक्स में अगस्त की तेजी ने निवेशकों को शानदार कमाई का मौका दिया है, लेकिन अब इसी तेजी को देखकर बिना सोचे-समझे निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है। आगे इन शेयरों की दिशा चीनी की कीमतों, एथेनॉल की कीमतों, वैश्विक सप्लाई और सरकारी नीतियों पर निर्भर करेगी। ऐसे में निवेशकों के लिए वैल्युएशन और कंपनी की वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखकर फैसला लेना ज्यादा महत्वपूर्ण होगा।