Knews Desk– टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के IPO और शेयर बाजार में लिस्टिंग को लेकर एक बार फिर सस्पेंस बरकरार है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 2026-27 के लिए अपर-लेयर नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) की नई सूची जारी की है। इसमें टाटा संस को एक बार फिर शामिल किया गया है। हालांकि, RBI ने साथ ही स्पष्ट किया है कि कंपनी की NBFC रजिस्ट्रेशन रद्द करने की लंबित अर्जी पर इस सूची में शामिल किए जाने का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
RBI की नई सूची में कुल 18 NBFCs को अपर लेयर में रखा गया है। खास बात यह है कि इस सूची में टाटा संस अकेली ऐसी कंपनी है जो शेयर बाजार में लिस्टेड नहीं है। ऐसे में टाटा संस की संभावित लिस्टिंग को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि कंपनी निश्चित रूप से IPO लेकर आएगी या शेयर बाजार में लिस्ट होगी।दरअसल, RBI के स्केल-बेस्ड रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के तहत अपर-लेयर में शामिल NBFCs पर अतिरिक्त नियामकीय नियम लागू होते हैं। इस श्रेणी में आने वाली कंपनियों के लिए लिस्टिंग से जुड़े नियम भी महत्वपूर्ण हैं। टाटा संस ने इस बाध्यता से बचने के लिए अपने कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (CIC) रजिस्ट्रेशन को सरेंडर करने की अर्जी RBI के पास दी हुई है। यह आवेदन अभी भी विचाराधीन है।
RBI ने अपने नए अपडेट में यह भी साफ किया है कि टाटा संस को अपर-लेयर NBFCs की सूची में शामिल किए जाने का मतलब यह नहीं है कि उसकी डी-रजिस्ट्रेशन अर्जी खारिज हो गई है। नियामक इस आवेदन पर स्वतंत्र रूप से फैसला लेगा। यही वजह है कि फिलहाल टाटा संस की स्थिति को ‘वेट एंड वॉच’ माना जा रहा है।कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी यानी CIC ऐसी NBFC होती है जिसका मुख्य कारोबार अपने ग्रुप की कंपनियों में निवेश करना होता है। नियमों के मुताबिक, CIC को अपनी नेट एसेट्स का कम से कम 90 फीसदी हिस्सा ग्रुप कंपनियों के इक्विटी शेयरों, प्रेफरेंस शेयरों, बॉन्ड, डिबेंचर, डेट या लोन जैसे निवेश में रखना होता है। टाटा संस भी इसी श्रेणी में आती है।
जानकारों के मुताबिक, टाटा संस के लिए आगे का रास्ता काफी हद तक RBI के फैसले पर निर्भर करेगा। अगर RBI कंपनी की डी-रजिस्ट्रेशन अर्जी मंजूर कर लेता है तो टाटा संस के लिए NBFC के तौर पर लागू लिस्टिंग की बाध्यता से बाहर निकलने का रास्ता खुल सकता है। ऐसी स्थिति में टाटा संस अपनी मौजूदा निजी कंपनी की स्थिति बरकरार रख सकती है।वहीं, अगर RBI आवेदन को खारिज कर देता है तो टाटा संस को लिस्टिंग की दिशा में आगे बढ़ना पड़ सकता है। गौरतलब है कि कंपनी के लिए पहले निर्धारित लिस्टिंग की समय-सीमा 30 सितंबर 2025 को समाप्त हो चुकी है। ऐसे में नियामक का अगला फैसला बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अगर RBI डी-रजिस्ट्रेशन की अर्जी खारिज करता है, तो टाटा संस के पास कानूनी विकल्प भी मौजूद रहेंगे। कंपनी संबंधित हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर कर सकती है। हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि नियामकीय मामलों में अदालतों का हस्तक्षेप सीमित होता है।फिलहाल RBI के नए अपडेट से टाटा संस के IPO पर कोई अंतिम फैसला सामने नहीं आया है। कंपनी की लिस्टिंग होगी या वह निजी कंपनी बनी रहेगी, इसका जवाब अब RBI की लंबित अर्जी पर आने वाले फैसले से ही मिलेगा।