त्योहारों से पहले महंगी हुई चीनी, 15 दिनों में रॉकेट की रफ्तार से बढ़े दाम

KNEWS DESK- चीनी भारतीय घरों में रोजमर्रा की जरूरत का अहम हिस्सा है। चाय से लेकर मिठाइयों और कई तरह के पकवानों तक इसका इस्तेमाल होता है। ऐसे में त्योहारों के सीजन से पहले चीनी की कीमतों में अचानक आई तेजी आम लोगों की जेब पर असर डाल सकती है। पिछले कुछ दिनों में देश के कई हिस्सों में चीनी के खुदरा दाम तेजी से बढ़े हैं।

19 जुलाई 2026 को देश में चीनी की औसत खुदरा कीमत करीब 47.82 रुपये प्रति किलो थी। एक महीने बाद 19 अगस्त को यही कीमत बढ़कर 54.06 रुपये प्रति किलो पहुंच गई। यानी करीब एक महीने में औसत कीमत में 6 रुपये से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। देश के कई स्थानीय बाजारों में स्थिति इससे भी ज्यादा चिंताजनक बताई जा रही है। कुछ इलाकों में चीनी के खुदरा भाव 58 से 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं। वहीं थोक बाजार में भी कीमतें बढ़कर करीब 5,400 से 5,800 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंचने की बात सामने आई है। कारोबारियों के मुताबिक, कुछ बाजारों में हाल के दिनों में खुदरा कीमतों में करीब 15 रुपये प्रति किलो तक का उछाल देखने को मिला है।

चीनी की कीमतों में तेजी का असर ऐसे समय में देखने को मिल रहा है, जब त्योहारों का सीजन शुरू होने वाला है। इस दौरान घरों के साथ-साथ मिठाई और खाद्य उत्पाद बनाने वाले कारोबारियों की चीनी की मांग भी बढ़ जाती है। मांग बढ़ने की स्थिति में कीमतों पर और दबाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है। चीनी के दाम बढ़ने की सबसे बड़ी वजह मौजूदा स्टॉक को माना जा रहा है। इंडस्ट्री से जुड़े सूत्रों के अनुसार, 30 सितंबर को मौजूदा शुगर सीजन खत्म होने तक देश में चीनी का स्टॉक घटकर करीब 30 से 35 लाख टन रह सकता है। आशंका है कि यह स्टॉक नए सीजन की शुरुआत और नई चीनी की पर्याप्त उपलब्धता होने तक की अवधि के लिए पर्याप्त नहीं होगा।

मौजूदा स्टॉक को लेकर बाजार में बनी चिंता के बीच सरकार ने चीनी के स्टॉक पर सीमा भी तय की है। इसका उद्देश्य जमाखोरी रोकना और बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखना है। हालांकि, इसके बावजूद खुदरा कीमतों में तेजी पर तत्काल नियंत्रण नजर नहीं आ रहा है। अब बाजार की नजर नए शुगर सीजन पर है। नई फसल और चीनी का उत्पादन शुरू होने के बाद आपूर्ति बढ़ने पर कीमतों में कुछ राहत मिलने की उम्मीद की जा सकती है। फिलहाल बढ़ते दाम त्योहारों से पहले आम उपभोक्ताओं और कारोबारियों दोनों के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं।

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