EPF Scheme 2026: अब PF खाते में 25% राशि रखना होगा अनिवार्य, जानिए नए नियम

Knews Desk– अगर आप नौकरीपेशा हैं और हर महीने आपकी सैलरी से कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) के लिए कटौती होती है, तो यह बदलाव आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। केंद्र सरकार ने EPF Scheme 2026 के तहत प्रोविडेंट फंड (PF) से आंशिक निकासी के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। नए नियम के अनुसार, अब नौकरी के दौरान PF खाते से पैसा निकालने वाले कर्मचारियों को अपने खाते में कम से कम 25 प्रतिशत राशि हर हाल में छोड़नी होगी। यानी अब कर्मचारी जरूरत पड़ने पर अपने पूरे PF बैलेंस की निकासी नहीं कर सकेंगे। सरकार का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य कर्मचारियों की रिटायरमेंट बचत को सुरक्षित रखना और भविष्य में आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है।यह नया प्रावधान सामाजिक सुरक्षा संहिता (Code on Social Security), 2020 के तहत लागू की गई EPF Scheme 2026 का हिस्सा है। पिछले कुछ वर्षों में यह देखा गया कि कई कर्मचारी नौकरी के दौरान बार-बार अपने PF खाते से बड़ी रकम निकाल लेते थे। इससे रिटायरमेंट के समय उनके पास पर्याप्त बचत नहीं बचती थी। इसी समस्या को देखते हुए सरकार ने यह नियम बनाया है, ताकि कर्मचारियों के भविष्य के लिए न्यूनतम राशि हमेशा सुरक्षित रहे और उन्हें बुढ़ापे में आर्थिक संकट का सामना न करना पड़े।

नई योजना में दो महत्वपूर्ण अवधारणाएं जोड़ी गई हैं। पहली है ‘Minimum Balance’, जिसका अर्थ है कि कर्मचारी के PF खाते में जमा कुल राशि का कम से कम 25 प्रतिशत हिस्सा हमेशा सुरक्षित रहेगा। इस राशि में कर्मचारी और नियोक्ता (कंपनी) दोनों का योगदान तथा उस पर मिलने वाला ब्याज भी शामिल होगा। दूसरी अवधारणा है ‘Eligible Member Balance’, यानी 25 प्रतिशत राशि अलग रखने के बाद जो शेष रकम बचती है, उसी में से कर्मचारी नियमों के अनुसार निकासी कर सकेगा।इसे एक उदाहरण से समझा जा सकता है। मान लीजिए किसी कर्मचारी के PF खाते में कुल 10 लाख रुपये जमा हैं। ऐसे में उसे कम से कम 2.5 लाख रुपये अपने खाते में छोड़ने होंगे। इसका मतलब है कि वह अधिकतम 7.5 लाख रुपये तक की आंशिक निकासी ही कर सकेगा। हालांकि यह निकासी भी EPFO द्वारा तय नियमों और पात्रता शर्तों के अनुसार ही संभव होगी।

ध्यान देने वाली बात यह है कि 25 प्रतिशत बैलेंस बनाए रखने का नियम केवल नौकरी के दौरान की जाने वाली आंशिक निकासी पर लागू होगा। यदि कोई कर्मचारी रिटायर हो जाता है, निर्धारित आयु पूरी कर लेता है, स्थायी रूप से काम करने में असमर्थ हो जाता है या ऐसे किसी अन्य मामले में जहां EPF का पूरा पैसा निकालने की अनुमति है, तब वह अपने खाते की पूरी राशि निकाल सकेगा। ऐसे मामलों में न्यूनतम 25 प्रतिशत बैलेंस बनाए रखने की शर्त लागू नहीं होगी।

सरकार ने केवल निकासी की सीमा ही तय नहीं की है, बल्कि निकासी की प्रक्रिया को भी पहले की तुलना में अधिक सरल बनाया है। पहले मेडिकल इलाज, बच्चों की पढ़ाई, शादी, घर खरीदने या निर्माण जैसी अलग-अलग जरूरतों के लिए अलग-अलग नियम और प्रक्रियाएं थीं। अब इन नियमों को सरल बनाने का प्रयास किया गया है, ताकि पात्र कर्मचारी आवश्यक दस्तावेजों के साथ आसानी से अपने PF खाते से निर्धारित राशि निकाल सकें।विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव कर्मचारियों के दीर्घकालिक हित में है। इससे एक ओर कर्मचारियों की रिटायरमेंट सेविंग सुरक्षित रहेगी, वहीं खाते में बची राशि पर लगातार ब्याज भी मिलता रहेगा, जिससे समय के साथ उनकी जमा पूंजी और बढ़ेगी। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कर्मचारी तत्काल जरूरतों को भी पूरा कर सकें और भविष्य के लिए भी पर्याप्त आर्थिक सुरक्षा बनाए रखें। नई EPF Scheme 2026 इसी संतुलन को ध्यान में रखकर तैयार की गई है, ताकि कर्मचारियों को वर्तमान और भविष्य दोनों में वित्तीय मजबूती मिल सके।

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