Knews Desk– भारत में शेयर बाजार में निवेश का दायरा तेजी से बढ़ रहा है. अब स्टॉक मार्केट सिर्फ मुंबई, दिल्ली और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों तक सीमित नहीं रह गया है. छोटे और मझोले शहरों के लोग भी तेजी से शेयर बाजार से जुड़ रहे हैं. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के जुलाई 2026 के आंकड़े इस बदलाव की बड़ी तस्वीर पेश करते हैं. आंकड़ों के मुताबिक, नए निवेशक रजिस्ट्रेशन में टियर-2 और टियर-3 शहरों की हिस्सेदारी करीब 36 फीसदी रही. यानी हर 100 नए निवेशकों में लगभग 36 निवेशक छोटे शहरों से बाजार में एंट्री कर रहे हैं.
यह ट्रेंड ऐसे समय में देखने को मिला है, जब दुनियाभर के बाजारों में अनिश्चितता बनी हुई है. ईरान-अमेरिका तनाव, अमेरिकी टैरिफ और ग्लोबल इकोनॉमी को लेकर चिंता के बीच शेयर बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. इसके बावजूद छोटे शहरों से नए निवेशकों की बढ़ती संख्या बताती है कि लोगों की बाजार में दिलचस्पी और निवेश को लेकर जागरूकता बढ़ रही है.जुलाई में कुल नए निवेशक रजिस्ट्रेशन में टॉप-10 जिलों की हिस्सेदारी 17.5 फीसदी रही, जबकि टॉप-50 जिलों को मिलाकर यह आंकड़ा 36.7 फीसदी तक पहुंच गया. दिल्ली-NCR 70.1 हजार नए निवेशकों के साथ सबसे आगे रहा. इसका कुल नए रजिस्ट्रेशन में हिस्सा 5.3 फीसदी था. इसके बाद मुंबई में 46.2 हजार यानी 3.5 फीसदी, बेंगलुरु में 19.9 हजार यानी 1.5 फीसदी नए निवेशक जुड़े. अहमदाबाद में 19.3 हजार और सूरत में 16.2 हजार नए रजिस्ट्रेशन दर्ज किए गए.
दिलचस्प बात यह है कि मंथली आधार पर कुछ शहरों में नए निवेशकों की संख्या में जबरदस्त तेजी देखने को मिली. अहमदाबाद में महीने-दर-महीने नए निवेशकों की संख्या 49.3 फीसदी बढ़ी, जबकि सूरत में 38.2 फीसदी की ग्रोथ दर्ज की गई. बेंगलुरु और जयपुर में भी क्रमशः 16.7 फीसदी और 16.6 फीसदी की मंथली बढ़ोतरी देखने को मिली.हालांकि, सालाना आधार पर तस्वीर थोड़ी अलग है. टॉप-10 जिलों में से किसी भी शहर ने साल-दर-साल पॉजिटिव ग्रोथ दर्ज नहीं की. अहमदाबाद में सालाना गिरावट सिर्फ 3.4 फीसदी रही, जो अन्य बड़े शहरों की तुलना में कम है. इससे पता चलता है कि मंथली रिकवरी मजबूत होने के बावजूद बाजार में नए निवेशकों की सालाना रफ्तार अभी पूरी तरह वापस नहीं आई है.
छोटे शहरों में शेयर बाजार की बढ़ती लोकप्रियता के पीछे कई वजहें हैं. सबसे बड़ी वजह डिजिटल प्लेटफॉर्म हैं. मोबाइल ऐप के जरिए डीमैट अकाउंट खोलना, ट्रेडिंग करना और निवेश की जानकारी हासिल करना पहले के मुकाबले काफी आसान हो गया है. डिस्काउंट ब्रोकिंग प्लेटफॉर्म और कम ट्रेडिंग फीस ने भी छोटे शहरों के लोगों के लिए बाजार में प्रवेश आसान किया है.इसके अलावा YouTube, सोशल मीडिया और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को निवेश और शेयर बाजार से जुड़ी जानकारी आसानी से मिल रही है. इससे शेयर बाजार को लेकर पुरानी धारणा भी बदल रही है. पहले इसे बड़े शहरों और बड़े निवेशकों तक सीमित माना जाता था, लेकिन अब छोटे शहरों के युवा और नौकरीपेशा लोग भी इसमें दिलचस्पी ले रहे हैं.कुल मिलाकर NSE के जुलाई के आंकड़े बताते हैं कि भारतीय शेयर बाजार का निवेशक आधार तेजी से फैल रहा है. महानगरों का दबदबा अभी कायम है, लेकिन टियर-2 और टियर-3 शहरों की बढ़ती भागीदारी आने वाले समय में बाजार की तस्वीर को और बदल सकती है. यह भारत में बढ़ती फाइनेंशियल अवेयरनेस और निवेश की पहुंच का भी संकेत है.