KNEWS DESK – उत्तर प्रदेश की तीन महत्वपूर्ण विधानसभा सीटों पर उपचुनाव को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। मऊ जिले की घोसी, सोनभद्र की दुद्धी और बरेली की फरीदपुर विधानसभा सीट अपने-अपने विधायकों के निधन के बाद रिक्त हो चुकी हैं, लेकिन चुनाव आयोग की ओर से अब तक उपचुनाव की तारीखों की घोषणा नहीं की गई है। खासकर घोसी सीट को लेकर सवाल ज्यादा उठ रहे हैं, क्योंकि इस सीट के रिक्त हुए छह महीने पूरे हो चुके हैं।
राजनीतिक दलों और स्थानीय नेताओं का कहना है कि सामान्य परिस्थितियों में किसी विधानसभा सीट के खाली होने के बाद छह महीने के भीतर उपचुनाव कराया जाना चाहिए। ऐसे में चुनाव कार्यक्रम घोषित न होने से तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।
दरअसल, घोसी विधानसभा सीट समाजवादी पार्टी के विधायक सुधाकर सिंह के निधन के बाद नवंबर 2025 में रिक्त हुई थी। इसके बाद विधानसभा सचिवालय ने सीट को रिक्त घोषित करते हुए इसकी जानकारी चुनाव आयोग को भेज दी थी। वहीं, जनवरी 2026 में फरीदपुर से बीजेपी विधायक प्रोफेसर श्याम बिहारी लाल और दुद्धी से समाजवादी पार्टी विधायक विजय सिंह के निधन के बाद दोनों सीटें भी खाली हो गई थीं। इन दोनों सीटों की सूचना भी समय रहते चुनाव आयोग को भेज दी गई थी।
इन तीनों सीटों में घोसी विधानसभा सीट सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बनी हुई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस सीट पर उपचुनाव की प्रक्रिया अब तक शुरू हो जानी चाहिए थी। लेकिन छह महीने बीत जाने के बावजूद आयोग की ओर से कोई अधिसूचना जारी नहीं की गई है।
सूत्रों के मुताबिक, उपचुनाव में देरी की एक वजह मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) माना जा रहा है। प्रदेश में यह प्रक्रिया पिछले वर्ष शुरू हुई थी और इसे दो बार बढ़ाया भी गया। हालांकि अप्रैल में अंतिम मतदाता सूची जारी हो चुकी है, इसके बावजूद चुनावी कार्यक्रम की घोषणा नहीं होने से सवाल खड़े हो रहे हैं।
कानूनी दृष्टि से देखा जाए तो जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 150 और 151A के तहत रिक्त विधानसभा सीटों पर उपचुनाव कराना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है। धारा 151A के अनुसार सामान्य परिस्थितियों में छह महीने के भीतर चुनाव कराया जाना चाहिए। हालांकि कुछ विशेष परिस्थितियों में आयोग को चुनाव टालने का अधिकार भी प्राप्त है।
उत्तर प्रदेश विधानसभा का वर्तमान कार्यकाल मई 2027 तक है। यानी विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने में अभी लगभग एक वर्ष का समय बाकी है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि इन सीटों पर उपचुनाव कराना आवश्यक है और आयोग को जल्द स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि चुनाव आयोग जल्द कोई निर्णय नहीं लेता है तो इस मुद्दे पर सवाल और तेज हो सकते हैं। फिलहाल आयोग की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है, जिससे राजनीतिक दलों और मतदाताओं के बीच असमंजस बना हुआ है।
अब सबकी निगाहें चुनाव आयोग पर टिकी हैं कि वह उत्तर प्रदेश की इन तीनों रिक्त विधानसभा सीटों पर उपचुनाव को लेकर कब फैसला लेता है और चुनावी कार्यक्रम की घोषणा करता है।