नकली बीजों का जाल! महाराष्ट्र में 5 हजार से ज्यादा किसान हुए परेशान, बुवाई के बाद भी नहीं निकली फसल

Knews Desk- महाराष्ट्र के मराठवाड़ा और विदर्भ क्षेत्र में नकली और खराब गुणवत्ता वाले बीजों ने हजारों किसानों को गहरे संकट में डाल दिया है। सोयाबीन सहित खरीफ फसलों की बुवाई के बावजूद खेतों में अंकुरण नहीं होने से किसानों की मेहनत और पैसा दोनों दांव पर लग गए हैं। अब तक 5,000 से अधिक किसानों ने कृषि विभाग, पुलिस और जिला प्रशासन से शिकायत की है। मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने जांच शुरू कर दी है और कई बीज कंपनियां जांच के दायरे में आ गई हैं।

किसानों की मेहनत पर फिरा पानी

लातूर, धाराशिव, बीड, परभणी, नांदेड़ समेत मराठवाड़ा और विदर्भ के कई जिलों से लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। किसानों का कहना है कि उन्होंने नामी कंपनियों के नाम पर महंगे दामों में बीज खरीदे, लेकिन बुवाई के 15 से 20 दिन बाद भी खेतों में फसल का अंकुरण नहीं हुआ। शुरुआत में सीमित संख्या में शिकायतें थीं, लेकिन अब इनकी संख्या बढ़कर पांच हजार से अधिक पहुंच गई है।

कर्ज लेकर की खेती, अब दोबारा खर्च की चिंता

सोयाबीन की खेती इस क्षेत्र के किसानों की आय का बड़ा आधार है। इस बार किसानों ने बैंक और निजी साहूकारों से कर्ज लेकर बीज, खाद, जुताई, सिंचाई और मजदूरी पर मोटी रकम खर्च की थी। बीज खराब निकलने से पूरी बुवाई बेकार हो गई। अब किसानों को दोबारा खेत तैयार कर फिर से बीज खरीदने पड़ेंगे, जिससे आर्थिक बोझ और बढ़ गया है।

सरकार ने शुरू की जांच

मामले के तूल पकड़ने के बाद महाराष्ट्र सरकार ने कार्रवाई के संकेत दिए हैं। कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे ने कहा कि जिन कंपनियों के खिलाफ शिकायतें मिली हैं, उनके बीजों की जांच कराई जा रही है। दोषी पाए जाने पर संबंधित कंपनियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। संयुक्त कृषि निदेशक महेश कुमार तीर्थकर के मुताबिक कई कंपनियों के बीजों के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं और रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई होगी।

राजनीतिक दलों ने भी उठाया मुद्दा

नकली बीजों का मामला अब राजनीतिक बहस का विषय भी बन गया है। पूर्व सांसद नवनीत राणा ने प्रभावित किसानों से मुलाकात कर दोषी कंपनियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज करने और उन्हें ब्लैकलिस्ट करने की मांग की। किसान नेता एवं विधायक बच्चू कडू ने सरकार से किसानों को तुरंत दोबारा बुवाई के लिए बीज उपलब्ध कराने की मांग की। वहीं सांसद ओमराजे निंबालकर ने किसानों को उचित मुआवजा देने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग उठाई।

हर साल कैसे फैलता है नकली बीजों का कारोबार?

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून से पहले नकली बीजों की बिक्री तेज हो जाती है। कुछ लोग बड़ी कंपनियों जैसी पैकिंग तैयार कर बाजार में घटिया या बिना प्रमाणित बीज बेच देते हैं। कई बार इन बीजों का अंकुरण प्रतिशत बेहद कम होता है, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है।

विशेषज्ञ किसानों को सलाह देते हैं कि बीज हमेशा अधिकृत विक्रेताओं से ही खरीदें, खरीद का बिल सुरक्षित रखें और पैकेट पर बैच नंबर, प्रमाणन, वैधता और अंकुरण प्रतिशत जरूर जांचें। यदि बीज अंकुरित न हों तो तुरंत कृषि विभाग को सूचना देकर खेत का निरीक्षण कराएं।

यवतमाल में बीज कंपनी पर दर्ज हुई एफआईआर

यवतमाल जिले के बाभुलगांव थाना क्षेत्र में एक बीज कंपनी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि कंपनी द्वारा बेचे गए सोयाबीन के बीज अंकुरित नहीं हुए, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ। प्रशासन के निर्देश पर कंपनी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, बीज अधिनियम और आवश्यक वस्तु अधिनियम की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।

सबसे बड़ा सवाल, नुकसान की भरपाई कौन करेगा?

सरकार जांच और कार्रवाई का भरोसा दे रही है, लेकिन प्रभावित किसानों की सबसे बड़ी चिंता उनके आर्थिक नुकसान की भरपाई है। किसानों का कहना है कि पहली बुवाई में खर्च हुए पैसे, दोबारा खेती की लागत और खराब हुए समय की जिम्मेदारी कौन लेगा? किसान दोषी कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, उचित मुआवजा और मुफ्त बीज उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं। फिलहाल जांच जारी है, लेकिन यह मामला किसानों के भरोसे और कृषि व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।

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