KNEWS DESK- खाने के बाद सीने में जलन, खट्टी डकार, पेट फूलना या मुंह में खट्टा स्वाद आना कई लोगों के लिए आम परेशानी है। कभी-कभार एसिडिटी होना सामान्य हो सकता है, लेकिन अगर यह समस्या बार-बार होने लगे तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
अनियमित खानपान, बहुत ज्यादा तला-भुना या मसालेदार भोजन, जरूरत से ज्यादा चाय-कॉफी और खाने के बाद तुरंत लेटने जैसी आदतें एसिडिटी को बढ़ा सकती हैं। ऐसे में सिर्फ बार-बार दवा लेने के बजाय अपनी रोजमर्रा की आदतों में बदलाव करना भी जरूरी है। सेलिब्रिटी न्यूट्रिशनिस्ट श्वेता शाह ने एसिडिटी से राहत के लिए तीन आसान उपाय बताए हैं, जिन्हें डेली रूटीन में शामिल किया जा सकता है।
सुबह मुनक्के से करें दिन की शुरुआत
एसिडिटी की शिकायत रहने पर सुबह 8 भीगे हुए मुनक्के खाने की सलाह दी गई है। मुनक्के में फाइबर और प्राकृतिक पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो पाचन प्रक्रिया को बेहतर रखने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, हर व्यक्ति का पाचन तंत्र अलग होता है। अगर मुनक्के खाने से गैस या कोई दूसरी परेशानी बढ़ती है तो इसे लेना बंद कर देना बेहतर है।
खाने के बाद सौंफ चबाने की आदत डालें
दोपहर के भोजन के बाद भीगी हुई सौंफ और रात के खाने के बाद करीब एक चम्मच सौंफ लेने की सलाह दी गई है। सौंफ का इस्तेमाल लंबे समय से पाचन संबंधी परेशानियों में किया जाता रहा है। यह पेट फूलने और खाने के बाद होने वाली असहजता को कम करने में कुछ लोगों की मदद कर सकती है। हालांकि, इसे एसिडिटी का इलाज नहीं माना जाना चाहिए।
शीतली या शीतकारी प्राणायाम भी करें
एसिडिटी को कंट्रोल करने के लिए सिर्फ खानपान ही नहीं, बल्कि रिलैक्सेशन और ब्रीदिंग एक्सरसाइज भी रूटीन का हिस्सा बनाई जा सकती हैं। एक्सपर्ट ने शीतली या शीतकारी प्राणायाम करने की सलाह दी है। इनमें से जो तकनीक आरामदायक लगे, उसका अभ्यास दोपहर और रात के भोजन से पहले करीब 10 बार किया जा सकता है। प्राणायाम करते समय अगर चक्कर, सांस लेने में परेशानी या असहजता महसूस हो तो इसे रोक देना चाहिए।
खाने के बाद तुरंत न लेटें
एसिडिटी की समस्या में खाना खाने के तुरंत बाद लेटने से बचना भी जरूरी है। भोजन के बाद करीब 10 मिनट हल्की वॉक करना मददगार हो सकता है। कुछ लोग भोजन के बाद वज्रासन में बैठना भी पसंद करते हैं। इसके साथ ही बहुत ज्यादा तला-भुना और मसालेदार खाना, जरूरत से ज्यादा चाय-कॉफी और देर रात भारी भोजन करने से बचना चाहिए।
कब डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है?
अगर एसिडिटी लगातार बनी रहती है, बार-बार दवा की जरूरत पड़ती है, निगलने में परेशानी होती है, लगातार उल्टी होती है, वजन बिना वजह कम हो रहा है या सीने में तेज दर्द होता है, तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। बार-बार होने वाली एसिडिटी कभी-कभी GERD या किसी अन्य पाचन संबंधी समस्या से भी जुड़ी हो सकती है। इसलिए लंबे समय तक लक्षण बने रहने पर सही कारण की जांच कराना ज्यादा बेहतर है।