KNEWS DESK– मध्य प्रदेश के उज्जैन में खड़े हनुमान मंदिर को लेकर चल रहे विवाद के बीच पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखा है। उन्होंने विकास कार्यों और धार्मिक आस्था के बीच संतुलन बनाने की अपील की है। उमा भारती का कहना है कि किसी धार्मिक स्थल को हटाना ही विकास कार्यों के लिए एकमात्र विकल्प नहीं होना चाहिए। जरूरत पड़ने पर सड़क के रूट या प्रोजेक्ट के डिजाइन में बदलाव किया जा सकता है।
भोपाल की मस्जिद का उदाहरण दिया
उमा भारती ने अपने पत्र में भोपाल की बुर्ज वाली मस्जिद का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2015 में करीब 150 साल पुरानी यह मस्जिद बैरागढ़-मिसरोद बीआरटीएस कॉरिडोर के प्रस्तावित रास्ते में आ रही थी। उस समय शिवराज सिंह चौहान की सरकार ने मस्जिद को हटाने के बजाय कॉरिडोर के रूट और डिजाइन में बदलाव किया था।
मस्जिद के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व को देखते हुए उसे सुरक्षित रखा गया। इसके बाद बड़े तालाब पर केबल ब्रिज बनाने का निर्णय लिया गया। उमा भारती ने कहा कि इसी तरह उज्जैन में भी ऐसा समाधान तलाशा जा सकता है, जिससे विकास कार्य प्रभावित न हों और धार्मिक आस्था भी सुरक्षित रहे।
मंदिर हटाने के बजाय वैकल्पिक रास्ते पर जोर
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने सुझाव दिया कि खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा को हटाने के बजाय वैकल्पिक मार्ग, तकनीकी समाधान और प्रोजेक्ट की री-डिजाइनिंग पर विचार किया जाए। उनका कहना है कि विकास और आस्था को साथ लेकर चलना ही बेहतर रास्ता है। उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की कि इस मामले में सभी पक्षों से बातचीत कर ऐसा समाधान निकाला जाए, जिससे किसी की धार्मिक भावनाएं आहत न हों और सिंहस्थ 2028 की तैयारियों से जुड़े विकास कार्य भी आगे बढ़ सकें।
करीब 170 साल पुराना है मंदिर
खड़े हनुमान मंदिर उज्जैन के कंठाल चौराहे और छत्रीचौक मार्ग पर स्थित है। इसे करीब 170 साल पुराना बताया जाता है। सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत सड़क चौड़ीकरण का काम प्रस्तावित है। इसी वजह से मंदिर को हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई थी।
पिछले कई दिनों से जेसीबी की मदद से मंदिर को हटाने का प्रयास किया जा रहा है। मंदिर का ढांचा तो हटा दिया गया, लेकिन प्रतिमा को हटाने में सफलता नहीं मिली। प्रतिमा अपनी जगह से टस से मस नहीं हुई। इसके बाद स्थानीय लोगों ने मांग की कि मंदिर को हटाने के बजाय कोई दूसरा रास्ता तलाशा जाए।
सरकार के रुख पर नजर
मंदिर मामले में उमा भारती के हस्तक्षेप से विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। अब सबकी नजर मुख्यमंत्री मोहन यादव और राज्य सरकार के अगले कदम पर है। देखना होगा कि सरकार उमा भारती के सुझाव पर विचार करती है या नहीं और क्या भोपाल की तर्ज पर उज्जैन में भी विकास कार्य तथा धार्मिक आस्था के बीच संतुलन बनाने का कोई वैकल्पिक समाधान सामने आता है।