KNEWS DESK- पश्चिम बंगाल की हाई प्रोफाइल फलता विधानसभा सीट पर पुनर्मतदान से ठीक पहले बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के उम्मीदवार Jahangir Khan ने मतदान से महज दो दिन पहले चुनावी मैदान छोड़ने का ऐलान कर दिया। उनके इस फैसले ने राज्य की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है।
नाम वापसी की घोषणा करते हुए Jahangir Khan ने कहा कि वे निजी कारणों की वजह से चुनाव नहीं लड़ेंगे। उन्होंने बयान में कहा कि मुख्यमंत्री फलता के विकास के लिए विशेष पैकेज दे रही हैं और क्षेत्र के हित को देखते हुए उन्होंने पुनर्निर्वाचन से हटने का फैसला लिया है।
हाल ही में चुनाव प्रचार के दौरान जहांगीर खान का एक बयान काफी वायरल हुआ था। यूपी के चर्चित आईपीएस अधिकारी Ajay Pal Sharma की ऑब्जर्वर के रूप में तैनाती पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा था, “अगर वो सिंघम हैं, तो मैं पुष्पा हूं।”
दरअसल, आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा ने कथित तौर पर धमकी देने वालों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी थी। इसके जवाब में जहांगीर खान ने फिल्मी अंदाज में खुद की तुलना ‘पुष्पा’ से कर दी थी, जिसके बाद उनका बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ।
फलता विधानसभा सीट डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है, जिसका प्रतिनिधित्व Abhishek Banerjee करते हैं। यही वजह है कि यहां होने वाला पुनर्मतदान राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है।
हालांकि, चुनाव प्रचार के दौरान ना तो Mamata Banerjee और ना ही पार्टी के अन्य बड़े नेताओं ने इस सीट पर कोई बड़ी जनसभा की।
दूसरी ओर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari ने मतदान से पहले फलता में रोड शो कर शक्ति प्रदर्शन किया। उन्होंने बीजेपी उम्मीदवार देबांशु पांडा के समर्थन में खुली गाड़ी में रोड शो किया, जिसमें बड़ी संख्या में समर्थक शामिल हुए।
रैली के दौरान ‘जय श्री राम’ के नारे लगे और समर्थकों ने जगह-जगह फूल बरसाकर स्वागत किया। बीजेपी कार्यकर्ताओं ने इसे पुनर्मतदान से पहले जनता के समर्थन का संकेत बताया।
हालिया पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए सत्ता हासिल की थी। पार्टी ने 294 में से 207 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि टीएमसी 80 सीटों तक सिमट गई। इसके बाद Suvendu Adhikari ने राज्य के पहले बीजेपी मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी।
अब फलता सीट पर पुनर्मतदान और जहांगीर खान के अचानक चुनाव मैदान छोड़ने से राज्य की राजनीति और भी दिलचस्प हो गई है।