Knews Desk– देश की न्याय व्यवस्था को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाकर अब 38 कर दी गई है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने केंद्र सरकार के इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही अब भारत के सर्वोच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर कुल 37 जज और CJI मिलाकर 38 न्यायाधीश होंगे।
कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि राष्ट्रपति ने सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अध्यादेश, 2026 को मंजूरी दे दी है। इसके तहत सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या को बढ़ाने का प्रावधान किया गया है। इससे पहले कैबिनेट ने भी इस प्रस्ताव को मंजूरी दी थी।
सरकार का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों की बढ़ती संख्या और न्यायिक कार्यभार को देखते हुए यह कदम जरूरी था। वर्तमान में अदालत पर करीब 95 हजार मामले लंबित हैं, जिसके चलते न्याय प्रक्रिया पर दबाव बढ़ रहा है। जजों की संख्या बढ़ने से मामलों के तेजी से निपटारे में मदद मिलने की उम्मीद है। गौरतलब है कि इससे पहले 2019 में भी सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाई गई थी। उस समय मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर संख्या 30 से बढ़ाकर 33 की गई थी। अब एक बार फिर इसमें वृद्धि करते हुए इसे 37 (CJI को छोड़कर) कर दिया गया है।

इस फैसले का कानूनी समुदाय ने स्वागत किया है। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने कहा कि बढ़ते केस लोड को देखते हुए यह कदम समय की जरूरत था। उन्होंने कहा कि न्यायाधीशों की कार्यक्षमता अच्छी है, लेकिन मामलों की संख्या इतनी अधिक है कि अतिरिक्त जजों की आवश्यकता थी। दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष सचिन पुरी ने भी इसे सकारात्मक कदम बताया और कहा कि इससे लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आएगी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता सुमित गहलोत ने यह भी कहा कि केवल जजों की संख्या बढ़ाने से समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी, बल्कि बेहतर केस मैनेजमेंट और तकनीकी सुधार भी जरूरी हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला न्यायिक प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल केसों के निपटारे की गति बढ़ेगी, बल्कि आम लोगों को समय पर न्याय मिलने की उम्मीद भी मजबूत होगी।