कलकत्ता होई कोर्ट ने बकरीद से सुनाया पहले बड़ा फैसला, बंगाल में पशु वध पर सरकार की रोक बरकरार

KNEWS DESK – Calcutta High Court ने ईद-उल-अजहा से पहले पशु कुर्बानी को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। अदालत ने राज्य सरकार द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों को बरकरार रखते हुए उन्हें चुनौती देने वाली सभी याचिकाएं खारिज कर दीं। हालांकि कोर्ट ने राज्य सरकार से यह भी कहा है कि वह 24 घंटे के भीतर इस बात पर विचार करे कि ईद के मौके पर किसी तरह की सीमित छूट देने की जरूरत है या नहीं।

यह मामला ईद-उल-अजहा यानी बकरीद पर पशुओं की कुर्बानी से जुड़े नियमों को लेकर सामने आया था। पश्चिम बंगाल सरकार ने हाल ही में एक नोटिफिकेशन जारी कर कहा था कि सिर्फ 14 साल से अधिक उम्र वाले या स्थायी रूप से विकलांग पशुओं की ही कुर्बानी दी जा सकेगी। इसके अलावा किसी भी पशु की कुर्बानी से पहले उसका वेटनरी चेकअप और फिटनेस सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य किया गया था।

सरकार के इस फैसले के खिलाफ कई लोगों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। इनमें Mahua Moitra समेत कई नेताओं और सामाजिक संगठनों के नाम शामिल थे। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि नए नियम धार्मिक परंपराओं के खिलाफ हैं और इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ेगा।

मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सुजॉय पॉल और जस्टिस पार्थ सारथी सेन की डिवीजन बेंच ने की। सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि 1950 के पशु हत्या कानून के तहत धार्मिक आधार पर विशेष छूट नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने यह भी माना कि राज्य सरकार को कानून के तहत नियम लागू करने का अधिकार है।

सरकार की ओर से जारी नोटिफिकेशन में कहा गया है कि गाय, बैल, सांड, बछड़े और भैंस जैसे पशुओं की कुर्बानी से पहले उनकी उम्र और स्वास्थ्य की जांच जरूरी होगी। सिर्फ वही पशु कुर्बानी के लिए योग्य माने जाएंगे जो 14 साल से ज्यादा उम्र के हों या फिर किसी गंभीर बीमारी, चोट या स्थायी विकलांगता से पीड़ित हों।

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील शदान फरासात ने अदालत में दलील दी कि बकरीद में कुर्बानी के लिए स्वस्थ पशु की आवश्यकता होती है, जबकि सरकार के नियम इसके विपरीत हैं। उन्होंने कहा कि इस्लामी परंपराओं के अनुसार बीमार या कमजोर पशु की कुर्बानी उचित नहीं मानी जाती।

हालांकि अदालत ने फिलहाल राज्य सरकार के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। साथ ही सरकार को यह विचार करने के लिए कहा कि क्या ईद के मौके पर किसी सीमित राहत की आवश्यकता हो सकती है। इस फैसले के बाद पश्चिम बंगाल में बकरीद को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस और तेज हो गई है।

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